भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

पृष्ठ 768, कुल 838 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 768

भूगोलाध्याय ७४३ के बिल्कुल ऊपर है इसलिए इस दिन सूर्य क्षितिज के नीचे नहीं जायगा अथवा अस्त ही न होगा और ६० घड़ी का दिन होगा। इसके विपरीत इतने ही दक्षिण अक्षांश पर इस दिन सूर्य के अहोरात्र वृत्त का व्यास शून्य होगा अर्थात् ६० घड़ी की रात होगी क्योंकि सूर्य वहाँ के क्षितिज रेखा पर ही ६० घड़ी तक रहेगा। जिस स्थान की यह चर्चा है उसका अक्षांश आजकल ९०° — २३° २७' = ६६° ३३' है। क्योंकि सूर्य की परम क्रान्ति २३° २७' के लगभग है। उत्तर वाले स्थान को आजकल उत्तरी ध्रुव-मण्डल और दक्षिण वाले स्थान को दक्षिणी ध्रुव मण्डल कहते हैं। चित्र १२७ जैसे सायन कर्क संक्रान्ति के दिन उत्तरी ध्रुव मंडल पर ६० घड़ी का दिन और दक्षिणी ध्रुव मंडल पर ६० घड़ी की रात होती है वैसे ही सायन मकर संक्रान्ति के दिन दक्षिणी ध्रुव मंडल पर ६० घड़ी का और उत्तरी ध्रुव मंडल पर ६० घड़ी की रात होती है। यह अवसर एक वर्ष में केवल एक बार आता है। श्लोकों में अक्षांश को अंशों में न लिख कर योजनों में विषुवत् रेखा से दूरी बतलायी गयी है। दिन-रात का प्रमाण ६० घड़ी का कहाँ होता है— तदन्तरेऽपि षष्ट्यन्तं क्षयवृद्धी अहर्निशोः । परतो विपरीतोऽयं भगोलः परिवर्तते ॥६२॥