भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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पृष्ठ 767

७४२ सूर्य-सिद्धान्त विज्ञान-भाष्य - सूर्य की जो क्रान्ति होती है उतने ही अक्षांश पर वह ठीक ऊपर होता है। क्रान्ति यदि उत्तर हो तो अक्षांश उत्तर समझना चाहिए और क्रान्ति दक्षिण हो तो अक्षांश दक्षिण समझना चाहिए (देखो त्रि० पृ० २६१)। कौन अक्षांश विषुवत् रेखा से कितने योजन पर होता है इसकी गणना जैसे की जाती है वैसे ही इस श्लोक में गणना करने की रीति बतलायी गयी है। भूपरिधि का मान योजनों में जो होता है वह ३६० अंश के समान हैं इसलिये अभीष्ट अक्षांश विषुवत् रेखा से कितने योजन पर है यही अनुपात इसमें बतलाया गया है। ३६० अंश : क्रान्त्यंश : : भूपरिधि योजन : अभीष्ट योजन । ६० घड़ी का दिन या ६० घड़ी की रात कहाँ होती है— परमाप्रक्रमादेवं योजनानि विशोधयेत् । भूवृत्तपादाच्छेषाणि यानि स्युर्योजनानि तैः ॥६०॥ अयनान्ते विलोमेन देवासुरविभागयोः । नाडीषष्ट्या सकृदहर्निशाऽन्यस्मिन्सकृत्तथा ॥६१॥ अनुवाद—(६०) इसी प्रकार सूर्य की परम-क्रान्ति से योजना का मान जान कर इसको भूपरिधि के चतुर्थ भाग से घटाने से जो आवे, विषुवत् रेखा से, उतने ही योजन पर (६१) अयन के अन्त में अर्थात् सायन कर्क संक्रान्ति के दिन उत्तर में ६० घड़ी का एक दिन और दक्षिण में ६० घड़ी की एक रात तथा मकर संक्रान्ति के दिन दक्षिण में ६० घड़ी का एक दिन और उत्तर में ६० घड़ी की एक रात होती है। विज्ञान-भाष्य—इन श्लोकों का अर्थ समझने के लिए स्पष्टाधिकार के श्लोक ६०-६१ तथा चित्र ४२, ४३ और उसके विवरण को दोहरा लेना चाहिये । इन चित्रों की सहायता से एक नया चित्र बनाकर यह जानना सुगम है कि जब सूर्य की क्रान्ति परम होती है तब किस अक्षांश पर इसका अहोरात्रवृत्त क्षितिज रेखा के बिल्कुल ऊपर हो जाता है। चित्र ४२ के ढंग पर चित्र १२७ बनाया गया है, अन्तर केवल इतना है कि इस चित्र का केन्द्र उस स्थान को सूचित करता है जिसका लम्बांश सूर्य की परम क्रान्ति के समान और अक्षांश उसके पूरक के समान है। उधखविद यहाँ का यामोत्तर-वृत्त, ख खस्वस्तिक, उद क्षितिज की उत्तर दक्षिण रेखा, विषुवन्मण्डल का एक बिन्दु और र सूर्य है जब इसकी क्रान्ति परम होती है अर्थात् सायन कर्क संक्रान्ति का दिन का सूर्य है। उध यहाँ का अक्षांश है इसलिए वीउ = विर । यह स्पष्ट है कि रउ इस दिन के सूर्य का अहोरात्रवृत्त है जो क्षितिज