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सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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पृष्ठ 771

७४६ सूर्य-सिद्धान्त ४ महीने का दिन होता है। इसी प्रकार जब सूर्य की उत्तर क्रान्ति ११° २६' से अधिक होती है अर्थात् जब सायन वृष, मिथुन, कर्क और सिंह राशियों में रहता है तब ७८° ३१' दक्षिण अक्षांश पर ४ महीने की रात और उत्तर अक्षांश पर ४ महीने का दिन होता है। श्लोकों में अक्षांश की जगह विषुवत् रेखा से योजनों में दूरी जानने की रीति दी गई है जैसा कि पहले के श्लोक में है। ६ महीने का दिन या रात कहाँ होती है - मेरौ मेषादिचक्रार्धं देवाः पश्यन्ति भास्करम् । सकृद्देवोदितं तद्वदसुराश्च तुलादिगम् ॥६७॥ अनुवाद - जब सूर्य मेष से कन्या तक ६ राशियों में रहता है तब उत्तर ध्रुव के रहने वाले देवता लोग उसको एक ही बार उदय हुआ देखते हैं अर्थात् ६ महीने तक उसका अस्त नहीं होता और जब सूर्य तुला से मीन राशियों में रहता है तब दक्षिण ध्रुव पर असुर लोग उसको बराबर उदय हुआ देखते हैं। विज्ञान-भाष्य - जब सूर्य सायन मेष में प्रवेश करता है तब यह उत्तर गोल में आता है और ६ मास तक बराबर उत्तर गोल में रहता है इसलिये उत्तर ध्रुव पर यह इन मासों में सदा दिखाई देता है और दक्षिण ध्रुव पर अदृश्य रहता है। इसीलिये इन ६ महीनों में देवताओं का एक दिन और असुरों की एक रात होती है। परन्तु जब सूर्य सायन तुला में आता है तब यह दक्षिण गोल में हो जाता है और ६ मास तक बराबर दक्षिण गोल में रहता है इसलिये इन ६ महीनों में असुर लोग सूर्य को बराबर देखा करते हैं और यहाँ ६ महीने का दिन होता है तथा उत्तर ध्रुव से अदृश्य होने के कारण देवताओं की ६ महीने की रात होती है। सायन कर्क या मकर संक्रान्ति के दिन सूर्य ठीक ऊपर कहाँ देख पड़ता है और यहाँ क्या विशेषता है-- भूमण्डलात् पञ्चदशे भागे दैवे तथाऽसुरे । उपरिष्टाद्व्रजत्यर्कः सौम्य याम्यायनान्तगः ॥६८॥ तदन्तरालयोश्छाया याम्योदक् संभवत्यपि । मेरोरभिमुख यातः परतश्च स्वभागयोः ॥६६॥ अनुवाद - (६८) विषुवत् रेखा से भूपरिधि के १५वें भाग की दूरी पर स्थित उत्तर या दक्षिण के स्थान के ठीक ऊपर उत्तरायण या दक्षिणायन के अन्तकाल का सूर्य भ्रमण करता है। (६६) इन्हीं रेखाओं के बीच में मध्याह्नकालिक छाया

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