सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें७५२ सूर्य-सिद्धान्त है। इस वेग के रहते हुए भी वह अपनी इच्छा-शक्ति से डब्बे में इधर-उधर चल फिर सकता है, उछल कूद सकता है, गेंद खेल सकता है। क्योंकि गाड़ी में रखी हुई जितनी वस्तुएँ हैं सबमें गाड़ी का वेग वर्तमान रहता है इसलिए यह वेग सबमें समान रूप से रहने के कारण मालूम नहीं होता। इसका पता भी सहज ही लगाया जा सकता है। यदि बहुत तीव्र चलती हुई गाड़ी में बैठ कर एक कंकड़ बाहर की ओर सीधा फेंका जाय तो जब तक वह पृथ्वी को नहीं छू लेता तब तक गाड़ी के साथ ही साथ आगे बढ़ता हुआ देख पड़ता है। यह बात उस समय और भी स्पष्ट देख पड़ती है जब कंकड़ उस समय फेंका जाय जिस समय गाड़ी किसी नदी के पुल पर चलने लगे क्योंकि ऐसी दशा में कंकड़ को धरातल तक पहुँचने में कुछ देर लगेगी इसलिए वह देर तक गाड़ी के साथ आगे बढ़ता हुआ देख पड़ेगा और उस जगह नहीं गिरेगा जिस जगह लक्ष्य करके फेंका जाय वरन् आगे बढ़ कर ठीक अपने ही सीध में गिरेगा। इससे जाना जा सकता है कि जब कोई वस्तु किसी वेग से चलती हुई गाड़ी, वायुयान आदि से अलग होती है तब भी उसमें वह वेग वर्तमान रहता जो गाड़ी में था और जब तक वह वस्तु किसी दूसरे वस्तु पर ठहर नहीं जाती तब तक उसका वेग नष्ट नहीं होता, इसी कारण यदि चलती हुई गाड़ी से कोई कूदता है तो वह गाड़ी के वेग के कारण आगे बढ़ कर गिर जाता है। इस बात की दूसरी परीक्षा इस प्रकार की जा सकती है। यह तो सभी को मालूम है कि यदि कोई गरुई चीज़ कुछ ऊँचाई से छोड़ दी जाय तो वह अपने ठीक नीचे पृथ्वी पर गिरती है। बड़ी रेलगाड़ी के डब्बे की ऊँचाई फ़र्श से १० फुट के लगभग होती है। इसलिए यदि छत के पास से पत्थर का टुकड़ा नीचे गिराया जाय तो फ़र्श पर पहुँचने में उसे ६, १० फुट चलना पड़ेगा और इसमें उसे पौन सेकंड के लगभग लगेगा। इतनी देर में यदि गाड़ी ३० मील प्रति घंटे की चाल से चलती हो तो ३३ फुट आगे बढ़ जाती है। इसलिए यदि वराहमिहिर का तर्क ठीक हो तो पत्थर के उस स्थान पर नहीं गिरना चाहिये जो उस स्थान से ठीक नीचे है जहाँ से पत्थर गिराया जाता है वरन् ३३ फुट पीछे गिरना चाहिये। परन्तु ऐसा देख नहीं पड़ता। देखने में वह वहीं गिरता है जिसके ठीक ऊपर से गिराया जाता है। इसका कारण यह है कि पत्थर जिस समय छत से गिराया जाता है उस समय उसमें गाड़ी की जो गति वर्तमान रहती है वह गिरने के समय भी वर्तमान रहती है इसलिए चीज गिरते रहने के साथ-साथ गाड़ी के साथ आगे भी बढ़ता जाता है और ठीक वहीं गिरता है जिसके ऊपर से गिराया जाता है। सर्कस के खेल में दौड़ते हुए घोड़े की पीठ पर से ऊपर से ऊपर उछल जाना और फिर उसी की पीठ पर आ जाना इसी नियम का परिणाम है।