सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
DevanagariHindipublished838 पृष्ठ
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मध्यमाधिकार ५५ चित्र ७ भ = पृथ्वी का केन्द्र । वभ = विषुवद्वृत्तीय त्रिज्या । उ = उत्तरी ध्रुव या सुमेरु । स, सा एक ही उत्तर-दक्षिण रेखा (meridian) के दो स्थान । स का अक्षांश = < व भ स । सा ,, = < व भ सा । दोनों के अक्षांशों का अन्तर = < स भ सा । फिर यह अनुपात करना चाहिए < स भ सा : ३६०° : : स सा : भूपरिधि ३६०° × स सा ∴ भूपरिधि = ----------------- < स भ सा अक्षांश निकालने की रीति त्रिप्रश्नाध्याय नामक तीसरे अध्याय में कई प्रकार से बतलाई जायगी । भूपरिधि इसी रीति से आजकल भी नापी जाती है; केवल सूक्ष्मयंत्रों के कारण अब अधिक शुद्धतापूर्वक यह काम किया जाता है ।