भारतकोश
सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)

Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary

भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा

DevanagariHindipublished838 पृष्ठ

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पृष्ठ 787

७६२ सूर्य-सिद्धान्त जो सहज ही देखा जा सकता है क्योंकि यदि लोलक लम्ब से २ फुट भी हटा कर झुलाया जाय तो ३ अंश के परिवर्तन में लोलक १ इञ्च से अधिक दूर हट जायगा । इस प्रकार के प्रयोग भिन्न-भिन्न अक्षांशों पर भिन्न-भिन्न विज्ञानवेत्ताओं ने किये और सबके प्रयोगों से यही बात सिद्ध होती है कि लोलक से बनी हुई रेखा के पूरा घूम जाने का समय = २४ घण्टा / ज्या अक्षांश और एक घण्टे में घूमने का परिमाण इस प्रकार निकलेगा (२४ घण्टा / ज्या अक्षांश) : १ घण्टा : : ३६० अंश : इष्ट परिमाण ∵ इष्ट परिमाण = (३६० ✕ ज्या अक्षांश) / २४ = १५ ज्या अक्षांश अगले पृष्ठ की सारिणी में १ भिन्न-भिन्न प्रयोगों का परिणाम दिया जाता है— इस सारणी से प्रत्यक्ष हो जाता है कि लोलक के स्पन्दन तल की दिशा का परिवर्तन पृथ्वी की ही भ्रमण गति से होता है । यह सब प्रयोग विषुवत् रेखा से उत्तर के देशों के लिए है । विषुवत् रेखा से दक्षिण के देशों में भी परिवर्तन इसी नियम से होता है । (३) पृथ्वी की भ्रमणगति सिद्ध करने के लिए एक तीसरी रीति भी है, जिसे फूको ने ही निकाली थी । यदि किसी चक्र का किनारा बहुत भारी हो और उसका अक्ष उसके केन्द्र से जाता हुआ उसके धरातल से समकोण बनाता हो वह चक्र अपने अक्ष पर बहुत वेग से घूम सकता हो तो ऐसे चक्र को घुमना पहिया (gyrostat) कहते हैं । यदि इसके साथ इसका आधार भी हो जिससे यह थमा रहता है तो इसका नाम घुमनाचक्र (gyroscope) हो जाता है । एक साधारण घुमना चक्र का चित्र १३३ है— क ख चक्र सम धरातल अक्ष ग घ पर घूम सकता है और जिस चक्र पर ग घ अक्ष है वह च छ सम धरातल अक्ष पर घूम सकता है (छ अक्षर चित्र में स्पष्ट नहीं है । यह घ के पास और यंत्र के कुछ पीछे है) । च छ अक्ष कुल को लेता हुआ ज म लम्ब अक्ष पर घूम सकता है । यह यंत्र ऐसा बनाना चाहिये कि इसके घूमते समय रगड़ कम से कम हो । ये तीनों अक्ष एक दूसरे से समकोण पर होने हैं, ग, घ और च छ अक्ष समधरातल में और ज म अक्ष लम्ब दिशा में । यदि रगड़

१. उर्दू के वैज्ञानिक मासिक पत्र 'रोशनी' अप्रैल १६१६ ई० पृष्ठ २८०-८१ के आधार पर जो Movements of the earth by Norman Lockyer F.R.S. से लिया गया है ।