सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंभूगोलाध्याय ७६६ कालेनाल्पेन भगणं भुङ्क्तेऽल्प भ्रमणाधितः । ग्रहः कालेन महता मण्डले महति भ्रमन ॥७६॥ स्वल्पयातो बहून भुङ्क्ते भगणांश्छीतदीधितिः । महत्या कक्षया गच्छंस्ततः स्वल्पं शनैश्चरः ॥७७॥ अनुवाद—(७५) जो ग्रह कक्षा ऊपर है अर्थात् पृथ्वी से दूर है उसका परिमाण अधिक है और जो ग्रह कक्षा नीचे है अर्थात् पृथ्वी से निकट है उसका परिमाण कम है । बड़ी कक्षा के अंश बड़े और छोटी कक्षा के अंश छोटे होते हैं । (७६) छोटी कक्षा पर चलने वाले ग्रह अल्प काल में अपना भगण अर्थात् चक्कर पूरा कर लेते हैं और बड़ी कक्षा पर चलने वाले ग्रह अधिक काल में अपना भगण पूरा करते हैं । (७७) चन्द्र कक्षा बहुत छोटी है इसलिए चन्द्रमा अनेक भगण पूरा करता है जब कि शनिश्चर बड़ी कक्षा में होने के कारण थोड़े ही भगण पूरा कर पाता है । विज्ञान-भाष्य—ग्रहों की कक्षाओं और उनकी गतियों के सम्बन्ध में मध्यमाधिकार श्लोक २६, २७ तथा उसके विज्ञान भाष्य पृष्ठ १४-१७ में कुछ बतलाया जा चुका है इसलिए यहाँ अधिक विस्तार की आवश्यकता नहीं है । बड़ी कक्षा के अंश बड़े और छोटी कक्षा के अंश छोटे कैसे होते हैं इसका प्रमाण पृष्ठ १४ के चित्र १ से सहज ही मिल सकता है । बड़े वृत्त का २४ अंश जितना बड़ा है उतना ही छोटे वृत्त का ३६ अंश है अर्थात् बड़े वृत्त का एक अंश छोटे वृत्त के एक अंश से बड़ा है । यह भी स्पष्ट है कि जो ग्रह बड़ी कक्षा में भ्रमण करते हैं उनका भगण काल बड़ा और जो ग्रह छोटी कक्षा में भ्रमण करते हैं उनका भगण काल छोटा होता है । परन्तु ग्रह के भगण काल और उसकी दूरी में ऐसा सरल सम्बन्ध नहीं जैसा कि भारतीय ज्योतिषी समझते थे और जैसा कि इसी अध्याय में आगे बतलाया गया है । यह सम्बन्ध केपलर के तीसरे नियम के अनुसार है जो ग्रह गतियों और उनकी दूरियों के सूक्ष्म विचार से निश्चित किया गया है (देखो पृष्ठ ८४-६१) । दिनपति, मासपति आदि जानने की रीति मन्दादधः क्रमेण स्युश्चतुर्या दिवसाधिपः । वर्षाधिपतयस्तद्वत्तृतीयाश्चे प्रकीर्तिता ॥७८॥ ऊर्ध्वं क्रमेण शशिनो मासानमधिपाः स्मृताः । होरेशा सूर्यतनयादधोधः क्रमशःस्तथा ॥७६॥ अनुवाद - (७८) शनि से नीचे का चौथा ग्रह क्रमानुसार दिनपति और तीसरा ग्रह वर्षपति होता है । (७६) चन्द्रमा से ऊपर के ग्रह क्रमशः मासपति तथा शनि से नीचे ग्रह क्रमशः होरापति होते हैं ।