सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमध्यमाधिकार ५६ चित्र १० भ = पृथ्वी का केन्द्र । उ = पृथ्वी का उत्तरी ध्रुव (सुमेरु) । द = पृथ्वी का दक्षिणी ध्रुव (कुमेरु) । व = विषुवत् रेखा का वह विन्दु जो स के ठीक दक्षिण है । स = अभीष्ट स्थान; उसवद स स्थान की उत्तर-दक्षिण रेखा । ∠ व भ स = स का अक्षांश । ∠ स भ उ = स का लम्बांश । उ द = पृथ्वी का अक्ष । स भ = स से पृथ्वी के अक्ष की दूरी = स स्थान की लम्बज्या, सिद्धान्तीय पद्धति से जैसे-जैसे उत्तर या दक्षिण जाइये तैसे-तैसे स्फुट परिधि कम होती जाती है यहां तक कि ध्रुवों पर स्फुट परिधि शून्य हो जाती है । इसी तरह अक्षांश बढ़ता जाता है और लम्बांश कम होता जाता है और ध्रुवों पर अक्षांश ९०° और लम्बांश शून्य हो जाता है । चित्र से यह भी प्रकट है कि 'स' स्थान की स्फुट परिधि स सा सि की