सूर्यसिद्धान्त (प्राचीन भारतीय खगोल गणित - सानुवाद सटीक)
Surya Siddhanta with Hindi Mathematical Commentary
भगवान् सूर्य / मय दानव / प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमध्यमाधिकार ६७ समय को कहते हैं जिस समय खग्रास या सम्पूर्ण ग्रहण का आरंभ होता है। इसको सम्मीलन काल भी कहते हैं । उन्मीलन=(१) आँखों का खोलना, (२) प्रकट होना, (३) पूर्ण ग्रसित चन्द्रमा का अंधकार से बाहर निकलना । इसलिए उन्मीलन काल उस समय को कहते हैं जिस समय चन्द्रमा का पूर्णग्रसित बिम्ब अंधकार से बाहर निकलने लगता है। स्पर्श काल उस समय को कहते हैं जिस समय चन्द्रमा का बिम्ब अंधकार में घुसने लगता है अर्थात् जिस समय से यथार्थ ग्रहण का आरंभ होता है । मोक्ष काल उस समय को कहते जिस समय चन्द्रमा का पूरा बिम्ब अंधकार के बाहर आ जाता है । चित्र १३ में र रवि का केन्द्र, प पृथ्वी का केन्द्र और छ पृथ्वी की छाया की नोक है । चन्द्रकक्षा में चन्द्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करता है। जब चन्द्रमा का केन्द्र चन्द्रकक्षा के उस बिन्दु पर पहुँचता है जहाँ १ लिखा हुआ है तब चन्द्र बिम्ब पृथ्वी- की छाया को स्पर्श करता है, इसलिए चन्द्रमा की यह स्थिति ग्रहण के समय स्पर्श काल की स्थिति है। इसी समय चन्द्र बिम्ब अंधकार में प्रवेश करता हुआ देख पड़ता है। जब चन्द्रमा उस स्थिति पर पहुँचता है जो २ अंक से सूचित किया गया है तब उसका पूरा बिम्ब अंधकार में हो जाता है। यह सम्मीलन काल अथवा निमीलन काल की स्थिति है। जब चन्द्रमा उस स्थिति पर पहुँचता है जो ३ अंक से प्रकट किया गया है तब चन्द्रमा अंधकार से बाहर निकलने को होता है। यही उन्मीलन काल की स्थिति है। और जब चन्द्रमा का पूरा बिम्ब अंधकार के बाहर निकल आता है जैसा कि ४ अंक से प्रकट किया गया है तब मोक्ष काल की स्थिति होती है । इन चार घटनाओं में से कोई घटना आकाश में जिस समय होती है उसी समय१ भूतल पर भी देख पड़ती है। परन्तु भूतल के सब स्थानों में सूर्योदय या मध्याह्न जिससे घड़ियाँ२ सुगमतापूर्वक शुद्ध की जा सकती हैं, एक ही समय नहीं होता जैसा कि ६०-६१ श्लोकों के विज्ञान-भाष्य में देशान्तर की परिभाषा बतलाते हुए सिद्ध किया गया है, इसलिए भिन्न-भिन्न स्थानों की घड़ियों में किसी घटना के देखने का समय भिन्न होता है। मध्य रेखा से पूर्व के स्थानों की घड़ियाँ मध्य रेखा १. यदि प्रकाश की गति का भी विचार किया जाय तो यह कहना अधिक शुद्ध होगा कि चन्द्रमा की कोई घटना भूतल पर सवा सेकंड पीछे देख पड़ती है । २. समय जानने के यंत्र ।