भारतकोश
सुश्रुत संहिता

सुश्रुत संहिता

Sushruta Samhita

महर्षि सुश्रुत (व्याख्याकार: अत्रिदेव गुप्त) द्वारा

स्रोत: मोतीलाल बनारसीदास - अत्रिदेव गुप्त कृत हिन्दी व्याख्या · मोतीलाल बनारसीदास, वाराणसी (उद्गम)

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अणुतैल४०५वातकफजन्य अशों की चिकित्साअष्टमोऽध्यायः ✓
शतपाक तैल४०५अग्नि और क्षार से४१४भगन्दरों की चिकित्सा का
स्नेहलवण४०६पित्तरक्तजन्य अशों की मृदुव्याख्यान४२१
कल्याण लवण४०६क्षार से४१४पांच प्रकार के भगन्दर४२१
पंचमोऽध्यायःअशों को जलाने की विधि४१४अपक्ष पिडिका वाली भगन्दरकी
महावातव्याधि चिकित्सा काअर्श रोगी को खाने के लिये४१४११ उपक्रमों से चिकित्सा४२२
व्याख्यान४०६अशों को जलाने के बादविशेष चिकित्सा४२२
वातरक्त के दो भेद४०६स्नेहकर्म४१४शतपोनक में व्रण को कभी चौड़ा
वातरक्त के कारण तथाक्षारकर्म, अग्निकर्म आदि बहुतन करे४२२
पूर्वरूप४०६सावधानी से करना चाहिये४१४डरपोक में शतपोनक कष्ट साध्य है४२२
वातरक्त किनको होता है४०६अर्शयंत्र का प्रमाण४१५स्वेद विधि४२२
वात प्रबल वातरक्त में लेप४०६अशों के लिये लेप४१५उध्मृीव चिकित्सा४२३
पित्त प्रबल वातरक्त में लेप४०६न दीखनेवाले अशों के लिये४१५परिखाविक भगन्दर चिकित्सा४२३
कफ प्रबल वातरक्त में लेप४०८दशमूलादि काथ४१५बच्चे में भगन्दर के लिये४२३
सब प्रकार के वातरक्त में४०८पिप्पल्यादि काथ४१६गतिव्रणों को नष्ट करने के
वातरक्त की तीव्र वेदना केभल्लातकविधि४१६लिये वर्ति४२३
लिये काथ४०८द्वितीय विधि४१७आगन्तुज भगन्दर४२४
वातरक्त में संवाहन४०८दोष की प्रधानता को देखकरवेदना नाश के उपाय४२४
अपतन्त्रक रोगी की चिकित्सा४०८घृत अवलेह आदि देने चाहिये४१७भगन्दर के शोधन कार्य में
पक्षाघात रोगीकी चिकित्सा४०९सप्तमोऽध्यायः ✓उत्तम द्रव्य४२४
मन्यास्तम्भ में चिकित्सा४१०अश्मरी चिकित्सा का व्याख्यान४१८व्रण के शोधन में हितकारी४२४
अपतर्पण रोगी की वातकफअश्मरी रोग के पूर्वरूपों मेंभगन्दर शामक तैल४२४
नाशक चिकित्सा करे४१०स्नेहन आदि४१८अन्य कई प्रकारके तैल४२५
अर्दित रोगीकी वातव्याधिवातजन्य अश्मरी को नष्ट करनेनवमोऽध्यायः
चिकित्सा के अनुसारवाला घृत४१८कुष्ठ चिकित्साव्याख्यान४२५
चिकित्सा४१०कुश आदि के कल्क से सिद्धस्वर्ग रोग के कारण४२५
किन में सिरावेध न करे४११किया घृत४१८स्वर्ग रोगवाला व्यक्ति४२५
कर्णशूल में४११वरुणादिगण के कल्क से सिद्धपथ्य४२५
तूनी, प्रतूनी में४११किया बकरी का घृत४१८पूर्वरूप में वमन, विरेचन४२५
आध्यान में४११शर्करा नाशक कई चूर्ण४१८असाध्य कुष्ठ४२६
अछीला और प्रत्यछीला में४१२अश्मरी, गुल्म, शर्करा को नष्टसर्व प्रथम वमन आदि संशोधन
हिंवादिचूर्ण४१२करने वाला क्षार४१८देकर स्नेहपान विधि से
ऊरुस्तम्भ चिकित्सा४१२शर्करा नाशक क्षार४१९चिकित्सा४२६
गुग्गुल आदि४१२अश्मरी में शस्त्रकर्म४१९महातिकक घृत४२६
षष्ठोऽध्यायः ✓किसकी पथरी नहीं निकलनीतिकक घृत४२६
अशों की चिकित्सा काचाहिये४२०सात-सिद्ध लेप४२६
व्याख्यान४१३मृत्तमार्ग का शोधन४२०ददु और शिवत्रों के लिये
चार प्रकारकी अशों कीशस्त्रकर्म के समय आठ अशोंविशेष योग४२७
चिकित्सा४१३को बचाये४२१छाले उत्पन्न करना४२७
अशों पर क्षार प्रयोग४१३छाछों के फूटने पर लेप४२७
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