सुश्रुत संहिता

सुश्रुत संहिता
Sushruta Samhita
महर्षि सुश्रुत (व्याख्याकार: अत्रिदेव गुप्त) द्वारा
स्रोत: मोतीलाल बनारसीदास - अत्रिदेव गुप्त कृत हिन्दी व्याख्या · मोतीलाल बनारसीदास, वाराणसी (उद्गम)
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गारीरस्थानम्
३६६
अस्थिसन्धयः २१०
(दशोत्तरे द्वे शते)
सन्धिसंख्यास्थिराः
चेष्टावन्तः
| १ शाखासु | = ६८ |
|---|---|
| २ कोष्ठे | = ५६ |
| ३ मूर्धनि | ८३ |
| २१० = |
| ० | ६८ | |
|---|---|---|
| ५६ | ३ | |
| ७३ | + | १० |
| १२६ | ८१ |
(१) शाखासु—(६८)
अस्थिसन्धिविस्तारवर्णनम्
एकस्मिन् सन्धिन् एकैकस्यां पादाङ्गुल्यां ३ × ४ = १२
सन्धिसंख्या
(२) अन्तराधी—(५६)
| अंगुष्ठे | = | २ |
|---|---|---|
| गुल्फ, जानुनि वक्षणे, | = | ३ |
| १ १ १ | = | १७ |
| एवं तिसृषु शाखासु | = | १७ × ४ = |
| कटिकपालेषु | = | ३ |
| पृष्ठवशे | = | २४ |
| पार्श्वयोः | = | २४ |
| उरसि | = | ८ |
| ५६ = |
६८
(३) मूर्धनि—(८३)
| श्रीवायाम् | = | ८ |
|---|---|---|
| कंठनाञ्चाम् | = | ३ |
| हृदययकृतकलोमनाडीषु | ||
| कंठनाडीनिबद्धाः | = | १८ |
५६
| दन्तमूलेषु | = | ३२ |
|---|---|---|
| काकलनासामूर्ध्नि | = | ३ |
| १ १ १ |
गंड-कर्ण-शंख-वर्त्त-नेत्र-हनुसंघिषु = १२ २, २, २, २, २, २,
| भ्रुवास्परिघात् | = | २ |
|---|---|---|
| शिखरःकपालेषु | = | ५ |
| ८३ = |
८३
२१०
२१०