सुश्रुत संहिता

सुश्रुत संहिता
Sushruta Samhita
महर्षि सुश्रुत (व्याख्याकार: अत्रिदेव गुप्त) द्वारा
स्रोत: मोतीलाल बनारसीदास - अत्रिदेव गुप्त कृत हिन्दी व्याख्या · मोतीलाल बनारसीदास, वाराणसी (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished872 पृष्ठ
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सुश्रुतसंहिता
स्नायूनां नवशतानि [६००]
| १ ग्राखासु | ६०० | एकस्मिन् सविधन | स्नायुसंख्या | |
|---|---|---|---|---|
| एकैकस्यां पादांगुल्याम् | ६ × ५ — ३० | |||
| तलकूर्चगुरुफेषु | १० × ३ — ३० | |||
| जंघायाम् | — ३० | |||
| जानुनि | — १० | |||
| ऊरौ | — १० | |||
| वंशणे | — ३० | |||
| १५० × ४ — ६०० | ||||
| २ कोष्ठे | २३० | कव्याम् | — ६० | ६०० |
| पृष्ठे | — ८० | |||
| पाश्चवयोः | — ६० | |||
| उरसि | — ३० | |||
| २३० | ||||
| ३ ग्रीवां प्रत्युर्ध्वम | ७० | ग्रीवायाम् | — ३६ | २३० |
| मूर्ध्नि | — ३४ | |||
| ७० | ||||
| ६०० | ७० | |||
| ६०० |
द्विविधाः स्नायवः
१ बाह्याः
२ आभ्यन्तराः
चतुर्विधाः स्नायवः
१ प्रतानवत्यः
शाखासु—
२ वृत्ताः
सर्वसंक्षिपु—
३ पृथव्यः
पाश्चोरसि, पृष्ठे शिरसि | आमपक्काशयान्तेषु, वस्तौ
२ सुषिराः
स्नायुकर्मे
एवमेव शरीरेऽस्मिन् यावन्तः सन्धयः स्मृताः । स्नायुमिवदुमिर्बद्धास्तेन भारसहा नराः ॥