भारतकोश
स्वरोदय विज्ञान

स्वरोदय विज्ञान

Swarodaya Vigyan

श्री स्वामी जी महाराज (पीताम्बरा पीठाधीश्वर) द्वारा

स्रोत: स्वरोदय विज्ञानं - पीताम्बरा पीठाधीश्वर · पीताम्बरा पीठ (उद्गम)

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(स्वरोदय विज्ञान)

(२१)

इस सम्बन्ध में हिन्दुस्तान के प्राचीन आचार्यों ने और बहुत सी बातें बतलाई हैं, परन्तु उनका सम्बन्ध स्वरोदय से नहीं है। लेकिन कुछ एक ऐसी आवश्यक बातें हैं जिन से अभ्यासी को बहुत कुछ सरलता होगी। यदि शुक्ल पक्ष में गर्भ रहे तो लड़की नहीं तो लड़का। कृष्ण पक्ष में लड़की होती है। यदि २, ४, ६, ८, १२, १४, १६ इत्यादि दिनों में संभोग किया जावे, तो लड़का और यदि १, ३, ५, ७, ९, ११, १३, १५ दिनों अर्थात् तिथियों में संभोग किया जावे तो लड़की होती है।

यदि पुरुष स्त्री की अपेक्षा बलवान् है तो लड़का होगा — अन्यथा लड़की। चाहिए कि इन सब बातों को मिलाकर काम लिया जावे, तो इच्छानुसार लड़का लड़की उत्पन्न हो सकते हैं।

(पृष्ठ ३१-३२ भी देखें)

यात्रा

दाहिने स्वर में जाइये, पूरब उत्तर राज। सुख सम्पत्ति आनन्द करें, सभी होइ शुभ काज॥

बायें स्वर में जाइये, दक्षिण पश्चिम देश। सुख आनन्द मंगल करें, जो जाए परदेश॥

यदि उत्तर और पूर्व की यात्रा करनी है तो दाहिने स्वर में प्रस्थान करें। यदि पश्चिम और दक्षिण की यात्रा करनी है, तो बायें स्वर में चले। इसके विपरीत चलने से हर प्रकार की हानि उठानी पड़ती है। यात्री घर भी वापिस नहीं आने पाता। कभी—कभी अकाल मृत्यु हो जाती है। लेखक को स्वयं अनुभव है, जबकि वह प्रयाग से छिन्दवाडे के लिए रवाना हुआ था, रात्रि का समय था। शाम से ही यह समस्या उपस्थित थी कि रेल का समय रात्रि का है। यात्रा विशेष कार्य के लिये है। एक आत्मीय की बीमारी का