भारतकोश
स्वरोदय विज्ञान

स्वरोदय विज्ञान

Swarodaya Vigyan

श्री स्वामी जी महाराज (पीताम्बरा पीठाधीश्वर) द्वारा

स्रोत: स्वरोदय विज्ञानं - पीताम्बरा पीठाधीश्वर · पीताम्बरा पीठ (उद्गम)

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विज्ञान)

न रही । दक्षिण न उसी स्त्र इस का एवं

आकाश, है। एक तृप्त्यु हो । किसी जो यात्रा है या ले उठा त कार्य

प्रकार

(स्वरोदय विज्ञान)

(२३)

प्रश्नोत्तर विधि

इसका अभ्यासी भविष्य का वर्णन बहुत अच्छी तरह से कर सकता है। यदि वह तत्त्व और स्वरो के साधन को पूरा कर चुका हो, तो प्रश्नों का उत्तर अति उत्तमता से दे सकता है। जब कोई आकर प्रश्न पूछे, तो देखो कि कौन सा स्वर चलता है और इस समय कौनसा तत्त्व चलता है। प्रश्नोत्तर करने वालों को और स्वरोदय के प्रेमियों को नीचे लिखे उपदेशों पर अवश्य रोज ध्यान रखना चाहिए।

१- आज प्रातःकाल कौन सा स्वर चल रहा था। वह गलत तो नहीं है अर्थात् वह विपरीत तो नहीं है। जिस तिथि में या पक्ष में जो स्वर चलना चाहिए वह ठीक है या नहीं।

२- आज कौन तिथि है? पक्ष कौन सा है?

३- कौन दिन है?

४- नक्षत्र कौन सा है? और कब तक है? जब कोई प्रश्न करें तो इन नीचे लिखी हुई बातों का ध्यान रखें -

१- प्रश्न करते समय कौन सा स्वर चल रहा है?

२- कौन सा तत्त्व चल रहा है?

३- लग्न कौन सी है?

४- प्रश्नकर्ता ने किस दिशा से बैठ कर प्रश्न किया है?

५- कौन सा नक्षत्र है?

६- कौनसी तिथि है?

७- स्वर अन्दर को जा रहा है या बाहर को अर्थात् प्रश्न करते समय साँस अन्दर ले रहे हो या निकाल रहे हो।

८- प्रश्नकर्ता का कौन सा स्वर चल रहा है?

९- कौन दिन है?

जिस दिन अभ्यासी का स्वर ठीक न हो- अर्थात् तिथि के अनुकूल न