भारतकोश
स्वरोदय विज्ञान

स्वरोदय विज्ञान

Swarodaya Vigyan

श्री स्वामी जी महाराज (पीताम्बरा पीठाधीश्वर) द्वारा

स्रोत: स्वरोदय विज्ञानं - पीताम्बरा पीठाधीश्वर · पीताम्बरा पीठ (उद्गम)

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(स्वरोदय विज्ञान)

हो, उस दिन या तो प्रातःकाल में उसे शुद्ध कर ले या उस दिन भर प्रश्न का काम न करें।

यदि इडा नाडी (चन्द्रनाडी) चल रही हो और प्रश्नकर्ता ने नीचे से या पीछे से या दाहिने से पूछा हो, तो काम नहीं होगा। यदि स्वर पिंगला है और प्रश्न नीचे, पीछे या दाहिने से किया गया है तो काम हो जायेगा।

नीचे पीछे दाहिने स्वर सूरज को राज।

यदि स्वर पिंगला है और प्रश्नकर्ता ने प्रश्न ऊपर से या सामने या बायीं ओर से किया है, तो काम न होगा। यदि स्वर इडा है और प्रश्न ऊपर, सामने या बायें से किया गया है, तो काम हो जावेगा।

यदि आकाश-तत्व में प्रश्न किया गया है, तो प्रश्न दिल्लीगी का है। यदि वायु तत्व में प्रश्न किया गया है तो प्रश्न यात्रा विषयक है। यदि अग्नि तत्व में प्रश्न किया गया हो, तो धातु सम्बन्धी प्रश्न होगा। जैसे रुपया पैसा इत्यादि। जल तत्व में प्रश्न जीव के सम्बन्ध में है। पृथ्वी तत्व का प्रश्न 'मूल' विषयक होगा।

वायु तत्व में प्रश्न यात्रा और कष्ट दूर करने के विषय में होगा। उत्तर दो कि फल मध्यम है।

अग्नि तत्व में प्रश्न धन, लाभ, हानि इत्यादि का होगा, उत्तर दो कि सफलता होगी, परन्तु परिश्रम के बाद। पृथ्वी तत्व में पृथ्वी के सम्बन्ध में प्रश्न होगा—खेती बाड़ी देश इत्यादि सम्बन्धी होगा। उत्तर दो कि कार्य उत्तमता से पूरा होगा। परन्तु देरी थोड़ी सी जरूर होगी। जल तत्व में प्रश्न जन्म, मरण, जीव का आना, प्रेम, इत्यादि के सम्बन्ध में होगा। उत्तर दो कि मन-मानी सफलता प्राप्त होगी।

जल पृथ्वी के योग में, जो कोई पूछे बात।

शशि घर में सूरज चले, कहो कारज हो जात।

पावक और आकाश में, वायु कमी जो होय।

जो कोई पूछे आयकर, शुभ कारज नहि होय॥