भारतकोश
स्वरोदय विज्ञान

स्वरोदय विज्ञान

Swarodaya Vigyan

श्री स्वामी जी महाराज (पीताम्बरा पीठाधीश्वर) द्वारा

स्रोत: स्वरोदय विज्ञानं - पीताम्बरा पीठाधीश्वर · पीताम्बरा पीठ (उद्गम)

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(स्वरोदय विज्ञान)

(२५)

जल पृथ्वी में दृढ़ता के काम किये जाते हैं। अग्नि और वायु दहिने स्वर में चरकारज से सम्बन्ध रखते हैं। जिस दिशा से प्रश्नकर्ता बैठ कर पूछे यदि वह स्वर चलता हो तो काम हो जावेगा अन्यथा नहीं। यदि इडा स्वर में प्रश्न किया गया है और तिथि इडा के अनुकूल है, तो काम बहुत अच्छी तरह हो जावेगा। अन्यथा कुछ विघ्न होगा। दिन और नक्षत्र यदि स्वर के अनुकूल हों तो काम शीघ्र ही हो जावेगा अन्यथा जितने अंश प्रतिकूल है, उतनी ही देरी से या विघ्नों से काम होगा।

यदि बहते स्वर की तरफ से; अर्थात् चलते श्वास की तरफ से बन्द स्वर पर कोई आकर बैठ जाये तो कह दो काम में विघ्न है।

जब स्वर भीतर को चले, कारज पूछे कोय।

पैज बाँध वासों कहो, मनसा पूर्ण होय।।

जब स्वर बाहर को चलें, तब पूछे कोई तोय।

वाकों ऐसे भासियो, नहिं कारज विधि कोय।।

दहिने सेती आय कर, बार्ये पूछे कोय।

जो बार्ये स्वर बन्द हैं, सफल काज नहिं होय।।

बार्ये सेती आयकर, दहिने पूछे धाय।

जो दहिनो स्वर बन्द हैं, कारज अफल बताय।।

यदि प्रश्नकर्ता और अभ्यासी के स्वर एक ही हों और सब बातें मिलती हो तो काम हो जायेगा। यदि स्वर और तत्व दोनों मिल जावें तो काम अवश्य हो जावें। उत्तर देते समय इन सब बातों का ख्याल रखना चाहिए। खूब सोच समझ कर उत्तर देना चाहिए कभी भी उत्तर झूठ न होगा।

गर्भ सम्बन्धी प्रश्न

प्रश्न — गर्भ है या नहीं?

उत्तर — यदि प्रश्न बन्द स्वर की ओर बैठ कर करें तो है अन्यथा नहीं। काम होगा या नहीं, इस प्रकार के प्रश्नों का निर्णय चलते स्वर से किया जाता