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स्वरोदय विज्ञान

स्वरोदय विज्ञान

Swarodaya Vigyan

श्री स्वामी जी महाराज (पीताम्बरा पीठाधीश्वर) द्वारा

स्रोत: स्वरोदय विज्ञानं - पीताम्बरा पीठाधीश्वर · पीताम्बरा पीठ (उद्गम)

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(स्वरोदय विज्ञान)

(३७)

उदय में विचार करें। दाहिनी सुर चलत होई। तो दाहिनी पांव जमीन पै धरे और तीन पाँव दाहिने आगे धरे और पृथ्वी को दंडवत करें। फिर सुर को विवेक करें। दाहिना सुर चलता होई तीन पेड़ में अपना कारज करें। चारि पहर रात्रि और चार पहर दिन सब सुख देखें। वैरी आता हुआ रुकें। अलफ से न मरें सब सूख देखें। कुमति को नास करें, सुमति उपजावे और कुछ करें तो उलाइतौ कारज करें सो सब फतह होइ। इतने कारज करें। ब्रह्मा, विष्णु, महेश बुध के उदय में उठि के खाट पै बैठे। सर को देखें। डरो सुर चलत होई तो डेरी पाँव जमीन पर धरे और चारि पग डेरी डग धरे। सूरति से आगे। फिर बैठे डेरा सुर चलता होई तो डेरो पांव दैके बैठे चले। तो चार पहर दिन और चारि पहर राति। सकल आनन्द में रहें और कुछ विचारें मन में सो पावें जो कुछ करें चाहे सो करें और अनभव कारज करें। उलाइतौ कारज न करे और हरि हमेश यही करता रहे विधी तो आनन्द देखें। सब सीतल देखें अरु डेरो सुर के दिना दाहिनी सुर चले तो अशुभ जानिये तो, काहू सो न बौले तब लौ दाहिनी चलै। जब डेरो सुर चले तब बोले तो असुभ न देखें और कुछ कारज करे तो फतै न होई। गड बैठि कै और मोरचा करे चन्द्र के राज।

नित्य उठने की विधि

चन्द्र के दिन ४-बुध, बृहस्पति, शुक्रवार, सोमवार। इन उदै उठन लागें तब सुर को विचार करिजौ। डेरो सुर चलत होई तो दिसा देखें। पश्चिम दक्षिण को मुख करके उठै अरु डेरो पाँव धरती में धरे। चार पैड़ आगै चले फिर बैठ जाई। फिर सुर को विचार करें। जो डेरे सुर चलत होइ तो अपनी कारज करें। मनमोहन फल पावै। जो दाहिनी सुर चलत होइ तौ अशुभ जानौ, कछु कारज न करे। जौ करें तो अफल होई।

अरु तीन दिन सूरज के हैं। शनीचर, इतवार, मंगल। इनके दिन के उदै में उठै तौ सुर को विचार करें। जौ दाहिनी सुर चलत होई तौ दिशा को विचार करें। पूर्व-उत्तर मुख करके उठै। दाहिनी सुर चलत होइ तौ दाहिनी