भारतकोश
स्वरोदय विज्ञान

स्वरोदय विज्ञान

Swarodaya Vigyan

श्री स्वामी जी महाराज (पीताम्बरा पीठाधीश्वर) द्वारा

स्रोत: स्वरोदय विज्ञानं - पीताम्बरा पीठाधीश्वर · पीताम्बरा पीठ (उद्गम)

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पृष्ठ 75

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(स्वरोदय विज्ञा (७५))

कहो द्यौस नों है रही आयु बाकी । भजौ रामनामै यहै मुक्ति ताकी । कदै वक्र जातौ जु नासाग्र जानौ । न दीखै अवदी दिना सात मानौ । नहीं और कीजै तहां तौ उपाई । भजौ राम नामै महा सुःख पाई । कहौ मात्र मंडल सुहै तारुका जू । न दीखै जुनै ना रही आयुषा जू । दिना पांच लौ जीव ताकौ बखानौ । महादेव बानी सबै सांचू मानौ । जु आरुन्धाती नाम जिभ्या कहावै । घटै आयु जौ पै नतौ दृष्टि आवै । कहै द्यौस नों है रही आयु बाकी । कहौ और निश्चै रही नाहिं ताकी । द्वै मूत्र विष्टा जहाँ एक कालै । सरै वायुता संग तौ जानि कालै । रही द्यौस लौ सुनियै आयु ताकी । अवस्था सुनौ होइ ऐसी जु जाकी । द्रगनि कौ मूदि अंगुली एक लावै । सु दावै मलै तौ वलै नै क पावै । अरुन सामरौ चक्र जा कौ न दीखै । दसई द्यौस जीवै भजे जगत ईसै । उठै प्रात ही सो वन को सिधावै । उदै होइ जब ऊपर को आवै । तहाँ होहि ठाड़ौ रविहि पीठी दै जू । जहां येकसी भूमिलै ना चलै जू ।

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