भारतकोश
स्वरोदय विज्ञान

स्वरोदय विज्ञान

Swarodaya Vigyan

श्री स्वामी जी महाराज (पीताम्बरा पीठाधीश्वर) द्वारा

स्रोत: स्वरोदय विज्ञानं - पीताम्बरा पीठाधीश्वर · पीताम्बरा पीठ (उद्गम)

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(स्वरोदय विज्ञान)

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भूख प्यास ताकों नहि लागै, तेहि लखि मृत्यु दूरि तें भागे। सीत ऊष्म डरु ताकों नाहीं, छूटै धंध सकल जग माहीं। महादेव देवनि के देवा, कही सिवा प्रति यह स्वर भेवा।

कबीरौवाच

जद्यपि कर्म क्रिया अरु आसन, हैं अनेक सब दुख विनासन। बहुतक कहैं करै कोउ ऐकै, गुर प्रसाद कोउ लहै विवेकै तातै मैं सब नाहि बखानी, भाखै सुगम-सिद्धि मैं जानी क्रिया जोग की अगम अपारा, कह लों ताहि करै सिंसार गोरिख सब इक इक करि साधी, भाँति भाँति करि हिय आराधी केतिक और साध जै भये, साधन साधि सिद्ध है गये जथा सिद्ध जग में परवाना, सोई जोग अलख पहिचाना माया नदी जगत में छाई, विविध सपन तहाँ देति दिखाई ज्ञान जोग जोगै नर जोई ताकों स्वप्न होइ नहि कोई सकल सिधि कछु काम न आवै, सिध सु परमात्म कौ धावै सो परमात्मा खों जो भाई, मिटी जाइ तिहि आवाजाई जाके लखै परम सुख पावै, तासौ क्यों नहि चित लगावै जिहि परमात्मा में जग ऐसै, मन में विविधि कल्पना जैसै छिन प्रकटै छिन दीखै नाहीं, जहां ते उपजे तहां समाहीं जौ परमात्मा खोजै चहियै, तौ पहिले यह जतन निवहियै साधक सूक्ष्म भोजन पावै, दिन दिन प्राणायाम बढ़ावै तातै सब इन्द्रिनि कों जीतैं, तिनि कों तिनि के गुन तैं रीतै पंचभूत को एक सरीरा, जानत जाहि सवै मतिधीरा लिंग सरीरा दूसरो लहियै, क्षर अक्षर इनि देउवनि कहियै सूक्ष्म सरीर तीसरौ राखौ, जे ज्ञानी ते इहि विधि भाखौ