स्वरोदय विज्ञान
Swarodaya Vigyan
श्री स्वामी जी महाराज (पीताम्बरा पीठाधीश्वर) द्वारा
स्रोत: स्वरोदय विज्ञानं - पीताम्बरा पीठाधीश्वर · पीताम्बरा पीठ (उद्गम)
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(स्वरोदय विज्ञान)
भू जल तेज वायु नम जानौ, स्थूल सरीर सु इनि को मानौ मन अरु बुधि चित्त अहंकारा, इनि तै लिंग सरीर संवारा सूक्ष्म सरीर तेजमय जानौ, क्रम ते इक इक कौ तुम मानौ। जब इन्द्रिनि को बसि करि पावै, मन चित्त बुधि अहंकार नसावै। लिंग सरीर बसै द्रग ताकी, ससि सम आभा बरनी जाकी। ताकै सूक्ष्म सरीरहि जानौ, जाकौ रस सम तेज बखानौ। आपनुपो लखिबौ यह कहियै, याहि लखै परमात्म लहियै। परमात्म याकैउ परतै, जाकी कहियै अलख अनंतै। जा ते ये प्रकास सब पावै, स्व प्रकास जेहि वेद बतावै। सब में बसै सबनि ते न्यारा, सोई सब संतनि कौ प्यारा। जातैं साधन जतन सो करै, जासै निरगम की गम परै। वातिनि जोग सिद्धि नहि होई, जो लौ सुचित न साथै कोई। अलखै लखै अलख को पावै, काहु भाति न चित भरमावै। वातिनि जोग सिद्धि नहि होइ, जौनों सुचित न साथै कोई॥ जो लौ नहीं लहै जगदीसै, तौ लौ साचु झूटु सौ दीसै।
इति श्री महा स्वरोदये ज्ञान दीपके उमा महेश्वर संवादे। भाषा रिषीकेस कृते योग साधन नाम षष्ठमो प्रकास ॥६॥
सम्पूर्णम् । संवत् १६३८॥ आषाढ कृष्ण ५ गुरुवासराँ॥
हस्ताक्षर जुगलकिशोर कशिव नूरगंज वारे के
॥ शुभम् भवत् ॥ श्री शुभ ॥