स्वरोदय विज्ञान
Swarodaya Vigyan
श्री स्वामी जी महाराज (पीताम्बरा पीठाधीश्वर) द्वारा
स्रोत: स्वरोदय विज्ञानं - पीताम्बरा पीठाधीश्वर · पीताम्बरा पीठ (उद्गम)
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कुछ उपयोगी सूचनाएँ
(१) ज्वर हो या किसी प्रकार की वेदना हो, फोड़ा, घाव, चाहें जो हो, किसी भी प्रकार की बीमारी के लक्षण ज्यों ही मालूम हों त्यों ही जिस नासिका से श्वास चलता हो उस नासिका को तुरन्त बन्द कर देना चाहिए। जितनी देर या जितने दिन तक शरीर स्वाभाविक स्थिति को प्राप्त न हो जाय, उतनी देर या उतने दिनों तक उस नाक को बन्द ही रखना चाहिए। इससे शरीर शीघ्र स्वस्थ हो जायेगा, अधिक दिन दुःख नहीं भोगना पड़ेगा।
(२) रास्ता चलने पर या किसी प्रकार का मेहनत का कार्य करने पर, जब शरीर बहुत ही थक जाय अथवा उस कारण से धातू गर्म हो जाय तो कुछ देर दाहिने करवट सो जाना चाहिए; इससे शीघ्र ही थोड़े समय में ही थकावट दूर हो जायेगी और शरीर स्वस्थ हो जाएगा।
(३) प्रतिदिन भोजन के बाद हाथ-मुंह धोकर कंघी से सिर के बाल झाड़ने चाहिए। कंघी इस तरह चलानी चाहिए कि उसके काँटे सिर में स्पर्श करें। इससे सिर पीड़ा और सम्बन्धी अन्य कोई बीमारी तथा वात व्याधि पैदा होने का भय नहीं रहता। ऐसी कोई पीड़ा यदि होगी तो वह बढ़ेगी नहीं। वरन् क्रमश आराम हो जायेगा। बाल शीघ्र नहीं पकेंगे।
(४) यदि कड़ी धूप में कहीं बाहर जाना हो तो रुमाल, चादर अथवा तौलिया आदि के द्वारा दोनों कानों को ढक लेना चाहिए, इससे धूप में चलने पर धूप जनित कोई दोष शरीर को स्पर्श नहीं करेगा और न शरीर गर्म और दुखी होगा। कानों को इस तरह ढकना चाहिए कि पूरे कान ढक जाय और कान में हवा न लगे।