भारतकोश
स्वरोदय विज्ञान

स्वरोदय विज्ञान

Swarodaya Vigyan

श्री स्वामी जी महाराज (पीताम्बरा पीठाधीश्वर) द्वारा

स्रोत: स्वरोदय विज्ञानं - पीताम्बरा पीठाधीश्वर · पीताम्बरा पीठ (उद्गम)

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(स्वरोदय विज्ञान)

(५) स्मरण शक्ति कम हो जाने पर मस्तक के ऊपर एक काठ की कील, उसके ऊपर एक काठ का टुकड़ा रख कर धीरे-धीरे उस आघात करना चाहिए।

(६) प्रतिदिन आधे घण्टे पआसन से बैठकर दांतों की जड़ में जीभ का अग्रभाग दबा कर रखने से सब तरह की व्याधियां नष्ट हो जाती है।

(७) ललाट के ऊपर पूर्ण चन्द्र के समान ज्योति का ध्यान करने से आयु बढ़ती है और कुष्ठादि रोग दूर होते हैं। सर्वदा दृष्टि के आगे पीत वर्ण उज्ज्वल ज्योति का ध्यान करने से बिना औषधि सब तरह के रोग अच्छे हो जाते हैं। और देह वृद्धावस्था के लक्षणों से रहित हो जाती है। सिर गर्म होने या घूमने पर मस्तक में श्वेत वर्ण या पूर्ण शरच्चन्द्र का ध्यान करने से पांच-सात मिनट में प्रत्यक्ष फल दिखाई देता है।

(८) प्यास से व्याकुल होने पर ऐसा ध्यान करना चाहिए कि जीभ के ऊपर कोई खट्टी चीज रखी हुई है। शरीर गर्म होने पर ठण्डी चीज शीतल होने पर गर्म चीज का ध्यान करना चाहिए।

(९) प्रतिदिन दोनों समय स्थिरासन से बैठ कर नाभि की ओर एकटक देखते हुए नाभि में वायु धारण और नाभिकन्द का ध्यान करने से अग्निमान्द्य, असाध्य अजीर्ण और प्रबल अतिसार इत्यादि सब प्रकार के उदरामय अवश्य आरोग्य हो जाते हैं और परिपाक शक्ति तथा जठराग्नि बढ़ जाती है।

(१०) सबेरे नींद टूटने पर जिस नासिका से श्वास चलता हो, उस और का हाथ मुंह पर रख कर शय्या से उठने पर मनोकामना सिद्ध होती है।

(११) रक्त अपामार्ग की जड़ हाथ में बाँध रखने से भूत प्रेतादि जनित सब प्रकार के ज्वर नष्ट होते हैं।

(१२) इमली के पौधे को उखाड़ कर उसकी जड़ गर्भिणी के सामने के सिर