भारतकोश
स्वदेशी भारत एवं विदेशी कंपनियों का षड़यन्त्र

स्वदेशी भारत एवं विदेशी कंपनियों का षड़यन्त्र

Swadeshi Bharat evam Videshi Kampaniyon Ka Shadyantra

राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा

स्रोत: Swadeshi Bharat & Rajiv Dixit Lectures · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)

DevanagariHindipublished77 पृष्ठ

पृष्ठ 26, कुल 77 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 26

वेदों की बात करें, हमारे मूल वेद मुश्किल से मिलते हैं। यदि वेदों की प्रतिलिपि पायी जाती है तो पता चलता है कि वे मैक्समूलर रचित हैं और मैक्समूलर ऐसा व्यक्ति था जो भारत को जानना चाहता था लेकिन कभी भारत आया नहीं, घर बैठे उसे जो कुछ भी भारत के बारे में मिला वो उसने लिख दिया। वेदों को उसने पढ़ा पूरी रूचि से, संस्कृत भी सीखी उसने, लेकिन उसे अधिकांश समझ में नहीं आया वेदों में, तो उसने अपने तरीको से लिख दिया, और आज हमें ये दिखाई देता है तो हमें ये सब विरोधाभासी दिखायी देती है क्योंकि हमारे मूल ग्रन्थों के साथ छेड़छाड़ कर दी, ज्ञान के भण्डार के साथ छेड़छाड़ कर दी, हमारे शास्त्रों के साथ छेड़छाड़ कर दी।

यदि हम मूल वेदों को देखो और मैक्समूलर रचित वेदों को देखे तो जमीन आसमान का अंतर है, जैसे मूल मनुस्मृति और अंग्रेजों द्वारा रचित मनुस्मृति में जमीन-आसमान का फर्क है। अंग्रेजों ने हमारे ग्रन्थों में बहुत कुछ मिलावट कर दी है। जैसे ये हमारे वेदों में से कोट कर देते है कि भारतवासी मांस खाते थे, गाय का मांस खाते थे, तो हमारे पास जो ज्ञान का भण्डार रहा संस्कृत भाषा में, इसमें बहुत नुकसान हो गया। ज्ञान हमारे यहाँ दुनिया में सबसे ज्यादा रहा है, क्योंकि भारत एक तरह से ज्ञान का ही हिस्सा है, 'भा' माने होता है "ज्ञान" और 'रत' माने होता है "लगा हुआ"। ये सब हमारे लिए चुनौती की बात है कि जो हमारे वेद रहे हैं, हमारे शास्त्र रहे हैं, उन सब को खोज कर दुनिया के सामने लाना है।

यदि विज्ञान की दृष्टि से देखा जाए तो भारत विज्ञान के क्षेत्र में भी सबसे अग्रणी रहा है। स्वास्थ्य को सही रखने हेतु आचार्य चरक ने 'चरक संहिता' की रचना की है।

उसमे आयुर्वेद से सभी बीमारियों का उपचार करने का विस्तार पूर्वक वर्णन किया गया है। रसोई में काम आने वाले मसालों (फारसी शब्द) अर्थात औषधियों का उपयोग किस मात्रा में करने से कौन सा रोग दूर होता है सब बताया गया है। महर्षि वाग्भट ने बताया कि जीवन शैली कैसे होनी चाहिए, कितनी मात्रा में जल लेना चाहिए, कैसे जल पीना चाहिए इत्यादि का विस्तार पूर्वक विवरण अष्टांगसंग्रह और अष्टांगहृदयसंहिता में दिया है। उदाहरणार्थ बताता हूँ महर्षि वाग्भट ने कहा था कि भोजन बनाने समय सूर्य का प्रकाश और पवन का स्पर्श आवश्यक है और हमारे गावों में भोजन ऐसे ही पकाया जाता है, जापानियों ने अरबों रुपये खर्च कर के बताया है कि खुले में भोजन बनाने से सम्पूर्ण पौष्टिक तत्व भोजन में आते हैं।

ऐसे बहुत सी बातों का उल्लेख इसमें मिलता है। आयुर्वेद में सभी बिमारियों का पूर्णतया उपचार है अगर आज की चिकित्सा विज्ञान 'एलोपैथी' और 'आयुर्वेद' का तुलनात्मक अध्ययन किया जाए तो पता चलता है कि एलोपैथी में सिर्फ बीमारी से लड़ा जाता है पूर्णतया इलाज नहीं होता। चिकित्सा विज्ञान की सबसे मुश्किल शाखा शल्य चिकित्सा (सर्जरी) होती है, वह भी विश्व को भारत की ही देन है। आचार्य सुश्रुत ने 'सुश्रुत संहिता' में शल्य चिकित्सा की विधि का वर्णन विस्तारपूर्वक किया है।

आचार्य सुश्रुत ने 125 उपकरणों का किया है जिनसे शल्य चिकित्सा की जाती थी उपकरणों का प्रयोग हो रहा है। शल्य मुश्किल भाग है प्लास्टिक शल्य चिकित्सा वह उदाहरण से यह बात बताना चाहूँगा " 1770

उल्लेख सुश्रुत संहिता में और आज भी उन 125 चिकित्सा का एक और भी भारत की देन है। एक ई० में एक राजा था हैदर