स्वदेशी भारत एवं विदेशी कंपनियों का षड़यन्त्र
Swadeshi Bharat evam Videshi Kampaniyon Ka Shadyantra
राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा
स्रोत: Swadeshi Bharat & Rajiv Dixit Lectures · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंरसायन शास्त्र में भारत के नागार्जुन का नाम अग्रणी है। नागार्जुन राख से सोना बनाने की विधि को जानते थे। भारत ने ही पारा बनाने की विधि का वर्णन विश्व को दिया है। सबसे पहले बर्फ बनाने की विधि चक्रवर्ती सम्राट हर्षवर्धन के द्वारा खोजी गयी। वह बहुत बड़ा रसायन शास्त्री था। शुष्क सेल का आविष्कार भी भारत में महर्षि अगस्त्य के द्वारा हुआ था। अगस्त्य संहिता में शुष्क सेल बनाने की विधि का पूर्ण विवरण है। डायरेक्ट करंट (दिष्ट धारा) की जानकारी महर्षि अगस्त्य ने ही दी थी। रसरत्न समुच्चय में जस्ता बनाने की विधि का उल्लेख मिलता है।
अर्थशास्त्र में सबसे बड़ा ग्रन्थ " अर्थशास्त्र" आचार्य चाणक्य के द्वारा दिया गया है जो कि ईसा से 400 वर्ष पूर्व दिया जा चुका है।
विश्व को सिकका बनाना भारत ने सिखाया इसका प्रमाण मोहनजोदड़ो और हड़प्पा से प्राप्त अवशेषों से चलता है। भारत से कई वर्षों से मसालों का निर्यात किया जा रहा है। भारत के इस्पात का विवरण हम पहले ही दे चुके हैं जो यूरोप के बाजारों में बहुत ही ऊँचे दामों पर बेचा जाता था।
स्पष्ट है कि भारत में कितना ज्ञान था और यह ज्ञान पूरे भारत में शिक्षण व्यवस्था से दिया जाता था। 1868 में ब्रिटेन में पहला विद्यालय एक कानून के तहत खुला था, उस समय भारत में लगभग 7 लाख 18 हजार 568 गुरुकुल चला करते थे
और उन गुरुकुलों में सिर्फ एक आचार्य होते थे और हर गुरुकुल में विद्यार्थियों की संख्या हजारों में हुआ करती थी। कक्षा नायक ही अपने साथी विद्यार्थियों को सिखाया करता था। यह शिक्षण व्यवस्था विश्व को भी भारत ने ही दी थी। प्रो० कूट ने अपनी डायरी में लिखा है कि जिस आचार्य से उसने प्लास्टिक सर्जरी सीखी थी तो सीखाने वाला आचार्य जाती से नाई था अर्थात स्पष्ट है कि जातिगत शिक्षण व्यवस्था भारत में
नहीं थी। आज भी ब्रिटेन में भारत की कक्षा नायक वाली शिक्षण व्यवस्था चलती है। जिस समय हेनसांग भारत आया था तब उसने अपने विवरण में लिखा है कि कलकत्ता में 20,000 विद्यार्थी अपनी शिक्षा पूर्ण कर अपने देश लौटने की तैयारी कर रहे हैं अर्थात भारत से ही समस्त ज्ञान विश्व में फैला है।
कृषि क्षेत्र में खेती करने के तरीके, पहला अविष्कार पहिया, उपयुक्त फसल प्राप्त करने के तरीके भारत ने ही दिए थे। कुछ अन्य अविष्कार जैसे हवाई जहाज भारत में हुए। 1895 में विश्व का सबसे पहला विमान मुंबई की चौपाटी पर शिवकर बापूजी तलपडे ने उड़ाया था।
विमान शास्त्र (महर्षि भारद्वाज द्वारा रचित) के अनुसार विमान बनाने के 500 सिद्धांत हैं और हर सिद्धांत से 32 अलग अलग तरह के विमान बनाये जा सकते हैं। 1895 में जो विमान उड़ा वह 1500 फीट उपर उड़ाया गया था और वह भी बिना चालक के उड़ाया गया था, उस विमान को सुरक्षित तरीके से उतारा भी गया था। इस विमान को उड़ते हुए राजकोट के राजा अशोक गायकवाड, मुंबई हार्ड कोर्ट के जज गोपाल रानाडे, और लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने देखा था। हमारी लापरवाही के कारण यह
अविष्कार (1903) राईट बंधू के नाम दर्ज हुआ। उन्होंने जो विमान बनाया वह 120 फीट उपर उड़कर नीचे गिर गया था। बारूद का आविष्कार भी भारत में हुआ। भारत में बारूद का उपयोग 6वीं शताब्दी में पटाखे बनाने के लिए किया जाता था। अंग्रेजों ने बारूद बनाना भारत में सीखा और उसका उपयोग हथियार बनाने के लिए किया।
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