भारतकोश
स्वदेशी भारत एवं विदेशी कंपनियों का षड़यन्त्र

स्वदेशी भारत एवं विदेशी कंपनियों का षड़यन्त्र

Swadeshi Bharat evam Videshi Kampaniyon Ka Shadyantra

राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा

स्रोत: Swadeshi Bharat & Rajiv Dixit Lectures · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)

DevanagariHindipublished77 पृष्ठ

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अध्यात्म के क्षेत्र में भारत का लोहा आज भी समग्र विश्व मानता है। आज भी यह स्पष्ट है कि अध्यात्म में हम से आगे कोई नहीं है।

अतः यह स्पष्ट हो चुका है कि भारत ने विश्व को हर क्षेत्र बहुत कुछ दिया है और हर क्षेत्र में भारत का योगदान है। भारत इसीलिए विश्व गुरु कहलाने लायक था और भारत को विश्व गुरु कहा भी गया है। अब हमें यह मिथक पालने की कोई आवश्यकता नहीं कि भारत का विश्व के प्रति कोई योगदान नहीं है। जो यह मिथक पाले हुए है तो उसे सत्य से अवगत कराना हमारा कर्तव्य है। अति महत्वपूर्ण कार्य ये भी है कि जो भी अविष्कार भारतवासियों ने किये है उनको भारतवासियों के नाम पर दर्ज करवाना है जो अविष्कार किसी और के नाम से दर्ज है उन्हें सही करवाया जाए और सभी तथ्य सबके सामने लाये जाये। जो हमारे ग्रंथों को नष्ट किया गया या लूटा गया, उन्हें वापस लाया जाये या फिर उनमें तोड़ मोड़ के पुनः लिख दिया गया है तो उन्हें दुबारा असली ग्रंथों से सुधार किया जाए यह भी हमारा कर्तव्य है ताकि आने वाली पीढ़ी सत्य स्वीकारे और भारत को हीन दृष्टि से न देख कर गौरवपूर्ण दृष्टि से देखे।

बहुराष्ट्रीय कंपनियां और मौत का व्यापार

आयुर्विज्ञान के क्षेत्र में आदिकाल से मनुष्य को शारीरिक और मानसिक कष्टों से मुक्ति दिलाने के लिए जितने भी प्रयत्न हुए हैं उनके पीछे मूल प्रेरणा रही है मानव सेवा, रोगियों की सेवा संसार के सभी धर्मों में एक प्रमुख अंग रहा है और इसे आध्यात्मिक उत्थान का व्यावहारिक आधार समझा गया है।

पिछले 200-300 वर्षों में बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के उदय के साथ ही सेवा का यह क्षेत्र बहुत बड़े व्यापार में बदल गया। बहुराष्ट्रीय दवा कम्पनियों द्वारा भारी मात्रा में दवा निर्माण के कारण और उनकी खपत करवाने के कारण चिकित्सा और दवा उद्योग की कार्य प्रणाली में भारी परिवर्तन आया। दोनों एक दूसरे के पूरक बन गये। व्यावसायिक रूप से तैयार होते चिकित्सकों ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाना शुरू कर दिया। वे बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के एजेण्ट बन गये और दूसरी तरफ बहुराष्ट्रीय दवा कम्पनियों ने ढेर सारे प्रलोभन और सुविधाएँ डॉक्टरों को उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है।

पिछले 5-7 वर्षों में जब से विश्व व्यापार संगठन (WTO) की दखलदांजी विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था में बढ़ी है। तब से बहुराष्ट्रीय दवा कम्पनियों की भूमिका भी संदिग्ध हो गयी है। ऐसी स्थिति में इस पूरे दवा उद्योग के बारे में आम जनता को बताने के लिए बहुत कुछ लिखा गया है। लेकिन वह आसानी से उपलब्ध नहीं होता। ऐसी स्थिति में आजादी बचाओं आंदोलन ने देश की जनता के सामने बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा की जा रही लूटखोरी के खिलाफ बिगुल बजाया है। इसी कड़ी में आंदोलन के वरिष्ठ साथी श्री वंशीधर मिश्र ने यह लेख (बहुराष्ट्रीय कंपनियां एवं मौत का व्यापार) तैयार किया।

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