स्वदेशी भारत एवं विदेशी कंपनियों का षड़यन्त्र
Swadeshi Bharat evam Videshi Kampaniyon Ka Shadyantra
राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा
स्रोत: Swadeshi Bharat & Rajiv Dixit Lectures · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंआंदोलन को उम्मीद है कि इस पुस्तक के माध्यम से जो विचार वह संप्रषित करना चाहता है वह आम जनता तक अवश्य पहुंचेगा।
आज जब विश्व व्यापार संगठन के कानून पुनः लागू होने जा रहे हैं तब यह आवश्यक हो जाता है कि देश के सभी कोनों से इसके खिलाफ आवाजें उठें और जनता इसके खिलाफ खड़ी हों।
राजीव दीक्षित
आजादी बचाओ आंदोलन
जीवन रक्षा से मौत के व्यापार तक
यूरोप की औद्योगिक क्रान्ति ने मानव इतिहास में युगान्तकारी परिवर्तन लाये। कृषि और कारीगरी पर टिके समाज की बुनियादें एक-एक करके ढहने लगीं। उत्पादन शैली, खाने-पीने के तौर-तरीके, पहनावा, भाषा, चिकित्सा पद्धतियों में परिवर्तन आये। ये परिवर्तन सतही नहीं, बुनियादी थे। विनिमय प्रधान कृषि-युगीन व्यवस्था, चलन के बाहर होने लगी और उनका स्थान ले लिया बेजान मशीनीय रिशतों पर टिके व्यापारिक समाज ने।
उद्योग का पेट भरने के लिए जंगल कटे। विशालकाय उद्योगों के रासायनिक कचरों, तेज दौड़ती गाड़ियों एवं रेलगाड़ियों के धुओं ने धरती, पानी और आसमान में जहर घोल दिया। इस विषाक्त वातावरण ने नई-नई बीमारियों को जन्म दिया।
औद्योगिक समाज की पहली जरूरत थी बाजार। इसलिए बाजार की तलाश में इंग्लैण्ड जैसे देशों ने दुनिया के कृषि प्रधान देशों पर कब्जा करना शुरू कर दिया। युद्ध हुए नये समाज की जटिलताओं ने तमाम तरह के तनावों को जन्म दिया। दुनिया के बड़े चिकित्सा वैज्ञानिकों का मानना है कि हाइपरटेन्शन, हृदय रोग, कैंसर, मस्तिष्क संबंधी तमाम बीमारियों का सबसे बड़ा कारण आधुनिक समाज के तनाव हैं। इस समाज की तेज भाग-दौड़ती जिंदगी में रोगों के इलाज के लिए परम्परागत चिकित्सा पद्धतियां अपर्याप्त साबित होने लगीं और धीरे-धीरे चलन से लगभग बाहर हो गयीं। इन परिस्थितियों में औद्योगिक समाज ने अपनी जरूरतों के मुताबिक 'एलोपैथी' को जन्म दिया। एलोपैथी की पहली दवा एंटीबायटिक के रूप में युद्ध में घायल सिपाहियों के उपचार के लिए खोजी गयी थी।
स्पष्ट रूप से औद्योगिक क्रांति के फलस्वरूप बदली सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक परिस्थितियों ने नई पाश्चात्य चिकित्सा पद्धति के लिए आधार-भूमि तैयार किया। बाजार पर कब्जा करने के लिए आग्रेयास्तों के प्रयोग से युक्त युद्ध की नई तकनीकी ने एक ऐसी चिकित्सा पद्धति को मानव इतिहास में जरूरी बना दिया जो घायल और मरते हुए सिपाहियों का उपचार करके उन्हें पुनः किसी समीपस्थ युद्ध के लिए तैयार कर सकें।
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