भारतकोश
स्वदेशी भारत एवं विदेशी कंपनियों का षड़यन्त्र

स्वदेशी भारत एवं विदेशी कंपनियों का षड़यन्त्र

Swadeshi Bharat evam Videshi Kampaniyon Ka Shadyantra

राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा

स्रोत: Swadeshi Bharat & Rajiv Dixit Lectures · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)

DevanagariHindipublished77 पृष्ठ

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गैट समझौते का सहारा लेकर बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ इस पेटेंट कानून को बदलवाना चाहती हैं, उनका कहना है कि भारतीय दवा कंपनियाँ उनके फार्मूलेशनस चुरा कर दवाइयों का उत्पादन कर रही हैं। हालाँकि यह सही नहीं है। 1970 के पेटेंट कानून के मुताबिक केवल 'प्रक्रिया पेटेंट' का फायदा देशी कंपनियों का मिला। परंतु अब गैट के मुताबिक 'उत्पाद पेटेंट' लागू हो जायेगा तो बहुराष्ट्रीय कंपनियों का अधिकतर दवाइयों पर अधिकार हो जायेगा। पेटेन्टीकृत दवाइयों का प्रतिशत नीचे सूची में दिया गया है, जिससे हम अन्दाजा लगा सकते हैं कि नया पेटेंट कानून लागू हो जाने के बाद बहुराष्ट्रीय कंपनियों की स्थिति कितनी मजबूत हो जायेगी। भविष्य में बनने वाली सभी दवाइयों पर पेटेंट अधिकार लागू होंगे जो बहुराष्ट्रीय कंपनियों के कब्जे में रहेगे। नये पेटेंट कानूनों का प्रभाव होगा

  1. (1) दवाइयों के दाम 5 से 20 गुना और अधिक हो जायेंगे।
  2. (2) दवाइयों की आपूर्ति प्रभावित होगी क्योंकि अब यह आयात पर ज्यादा निर्भर होगी।
  3. (3) दवा उद्योग में नये पूंजी निवेश पर असर पड़ेगा।
  4. (4) सरकार द्वारा संचालित राष्ट्रीय स्वास्थ्य रक्षा कार्यक्रम जो उन नागरिकों के लिए चलाए जाते हैं जो अपने स्वास्थ्य की आवश्यकताओं के लिए खर्च नहीं कर सकते, प्रभावित होंगे।
  5. (5) राष्ट्रीय दवा उद्योग का विकास प्रभावित होगा।
  6. (6) राष्ट्रीय शोध एवं विकास प्रभावित होगा।

आज दुनिया के दवा उत्पादन के 90% हिस्से पर 30 बड़ी बहुराष्ट्रीय दवा कंपनियाँ अपना अधिकार रखती हैं और अनुचित पेटेंट व्यवस्था और बौद्धिक सम्पदा अधिकारों की रक्षा के नाम पर, 90 विकासशील देशों, जहाँ दवा का स्थानीय उत्पादन नहीं है और वे अधिकतर आयात पर निर्भर करते हैं, की असहाय गरीब और निरीह जनता का शोषण कर रही हैं। इन सभी 90 देशों में विकसित देशों के ही पेटेंट कानून लागू हो चुके हैं जिन्हें मानने का कारण वे 2000% अधिक मूल्य देकर अपना शोषण करवा रहे हैं। इण्डियन ड्रग्स मैनुफैक्चर्स एसोसियेशन के अध्यक्ष श्री.आई.ए. मोदी कहते हैं कि "भारत सहित करीब 15 विकासशील देश ऐसे हैं जो अपनी दवा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए फार्मूलेशन के उत्पादन में लगभग आत्मनिर्भर हैं। इन देशों में भी भारत ही एक मात्र देश है जहाँ दवा उत्पादन अभी भी देशी उत्पादकों के हाथ में है। अन्य 14 देशों में दवाइयों का मुख्य उत्पादन या तो सीधे बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा नियन्त्रित होता है या बहुराष्ट्रीय कंपनियों से लाइसेंस प्राप्त राष्ट्रीय इकाइयों द्वारा होता है जिनकी दवाइयों के बिक्री मूल्य के प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ नियन्त्रित करती हैं। भारत इसका अपवाद है यहाँ 60% से अधिक दवा फार्मूलेशन और 80% से अधिक बल्क दवाएं पूरी तरह से राष्ट्रीय इकाइयों द्वारा उत्पादित के कारण और भारत में 1970 के पेटेंट कानून के कारण दवा मूल्य संसार में सबसे सस्ते हैं। मूल्यों में 500% से 2000% तक का अन्तर है।

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