भारतकोश
स्वदेशी भारत एवं विदेशी कंपनियों का षड़यन्त्र

स्वदेशी भारत एवं विदेशी कंपनियों का षड़यन्त्र

Swadeshi Bharat evam Videshi Kampaniyon Ka Shadyantra

राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा

स्रोत: Swadeshi Bharat & Rajiv Dixit Lectures · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)

DevanagariHindipublished77 पृष्ठ

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जान लेवा दवाओं का व्यापार

हमारे देश में इस समय लगभग 515 दवाएँ ऐसी हैं जो बाजार में लगभग 8000 विभिन्न नामों से बिक रही हैं। इन दवाओं पर दुनिया के तमाम देशों में पाबन्दी लगायी जा चुकी है तथा इनके निर्माण और बिक्री को घातक अपराध घोषित किया जा चुका है। डाक्टरों और वैज्ञानिकों का कहना है कि ये दवाएँ प्राणघातक हैं और आदमी के रक्त को प्रदूषित कर कैंसर, लकवा, अंधापन, विकलांगता जैसी भयंकर बीमारियों को जन्म देती हैं तथा शरीर की रोग से लड़ने की क्षमता खत्म कर देती हैं। ये दवाइयाँ आने वाली पीढ़ियों में शारीरिक तथा मानसिक-विकृतियाँ भी पैदा करती हैं। यह गम्भीर चिन्ता का विषय है कि दुनिया के अन्य तमाम देशों में “जहर” घोषित की जाने वाली कुछ दवाएँ हिन्दुस्तान में खुली बिक्री की इजाजत पा चुकी हैं। यहाँ कुछ ऐसी दवाओं के नाम दिये जा रहे हैं जो दूसरे तमाम देशों में प्रतिबंधित हैं लेकिन हमारे यहाँ बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा बनायी और बेची जाती है। इन दवाओं को मुख्य रूप से में एण्ड बेकर, सीबा गायकी, बारोजवेलकम, पार्क डेविस, ज्योफ्रीमैन्स, फाइजर, हेक्स्ट, सैण्डोज, रोस, स्केफ, एस.जी. फार्मास्युटिकल, ग्लैक्सो, बूट्स कंपनी, ईस्ट इंडिया कंपनी तथा इंफार इण्डिया कंपनियाँ बनाती हैं। इन दवाओं को बेचकर ये कंपनियाँ देश का अरबों रूपया प्रतिवर्ष बाहर भेज रही हैं।

बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने ऐसे कई सम्मिश्रण बनाये हैं जो कि निरर्थक होने के साथ-साथ हानिप्रद भी होते हैं। मिसाल के तौर पर क्लोरोफेनिकाल तथा स्ट्रैटोमाइसिन का सम्मिश्रण जो पेचिस में दिया जाता है। विशेषज्ञ डॉक्टरों का

कहना है कि यह सम्मिश्रण बहुत ही अतर्कसंगत और नुकसानदेह है, फायदा बिल्कुल नहीं औषध सलाहकारी समिति की 1980 की सिफारिश में क्लोरोफेनिकाल के सभी एफ.डी. सम्मिश्रणों पर रोक लगा दी गयी थी। लेकिन दुःख कि बात है कि इस रोग में उक्त सम्मिश्रण शामिल नहीं था। फलतः आज भी यह खुले बाजारों में उपलब्ध है। इसी तरह पेंसिलीन और स्ट्रैटोमाइसिन, पेंसिलीन और सल्फानामाइड्स, विटामिन्स और एनालजिक्स, टेट्रासाइक्लीन एवं विटामिन सी, आदि के सम्मिश्रण भी बेहद नुकसानदेह हैं। लेकिन सारे सम्मिश्रण बहुराष्ट्रीय निगमों द्वारा तैयार किये और आपूर्ति किये जाते हैं।

खतरनाक गर्भ निरोधक बहुराष्ट्रीय साम्राज्यवाद के गुप्त हथियार

बहुराष्ट्रीय कंपनियों, विश्व बैंक और अंतराष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा थोपे गये संरचनात्मक समायोजन · कार्यक्रमों की अनिवार्य शर्त है जनसंख्या नियंत्रण। हालांकि इस शर्त को लोगों की जिंदगी बेहतर बनाने से कोई मतलब नहीं पर यह शर्त सुनिश्चित करती है कि हर हथकण्डा अपना कर हर हालत में विकासशील देशों की जनसंख्या को नियंत्रित किया जाए और साथ में बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा बनाये जा रहे खतरनाक गर्भ निरोधकों को बेचकर भारी मुनाफा भी कमाया जाए। पिछले तीन दशकों से सरकार का परिवार नियोजन कार्यक्रम अमेरिकी आर्थिक सहायता से जुड़ी शर्तों के अनुसार चल रहा था। जिसके लिए सरकार ने गर्भ निरोधकों के स्थान पर नसबंदी पर जोर

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