भारतकोश
स्वदेशी भारत एवं विदेशी कंपनियों का षड़यन्त्र

स्वदेशी भारत एवं विदेशी कंपनियों का षड़यन्त्र

Swadeshi Bharat evam Videshi Kampaniyon Ka Shadyantra

राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा

स्रोत: Swadeshi Bharat & Rajiv Dixit Lectures · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)

DevanagariHindipublished77 पृष्ठ

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में रूई(कपास) उगाने वाली पट्टी में इन कीटनाशकों के कारण खेत मजदूरों में अन्धत्व, कैंसर, अंगविकृतियाँ, लीवर के रोग तथा ज्ञानतन्तुओं के रोग होने के उदाहरण पाये गये हैं।

पेप्सी कोला-कोका कोला का सच सपनों के सौदागर

5 अगस्त 2003 को भारत के सभी टी.वी चैनलों एवं समाचार पत्रों में पेप्सी-कोला एवं कोका-कोला के बारे में एक भंयकर सत्य उद्घाटित हुआ। दिल्ली की एक वैज्ञानिक संस्था “सेन्टर फॉर सायनस एण्ड एनवायरमेंट” की खोजी रिपोर्ट में बताया गया कि पेप्सी एवं कोका-कोला के सभी ठंडे पेयों में अत्यन्त जहरीले एवं खतरनाक कीटनाशक रसायन मिले हुए हैं। उपर्युक्त संस्था की प्रयोगशाला में पेप्सी एवं कोका-कोला के 12 नमूनों की जांच की गयी। इसमें पाया गया कि इन सभी नमूनों में बहुत अधिक मात्रा में रासायनिक कीटनाशक जैसे क्लोरोपायरीफास, मैलाथियान, डी.डी.टी., लिन्डेन आदि मिले हुए हैं। ये सभी कीटनाशक शरीर के लिए अत्यन्त ही हानिकारक होते हैं। इन कीटनाशकों का शरीर के स्वास्थ्य पर बहुत ही खराब असर होता है। इन कीटनाशकों का लीवर, किडनी, शरीर के प्रतिरोधक तंत्र, प्रजनन तंत्र, तंत्रिका तंत्र, श्वसन तंत्र आदि पर बहुत बुरा असर होता है। उदाहरण के लिए लिन्डेन नामक कीटनाशक से शरीर में कैंसर होता है तथा शरीर की सभी ग्रंथियों को भारी नुकसान पहुँचता है। लिन्डेन कीटनाशक की 40 मिली मात्रा किसी भी महिला या पुरुष की क्षमता को समाप्त कर देती है। इस लिन्डेन से लीवर का कैंसर तथा किडनी का कैंसर भी होता है। शरीर के हृदय को रक्त देने वाली नलियों को भी लिन्डेन क्षतिग्रस्त कर देता है। इसी तरह डी.डी.टी. नाम का रासायनिक कीटनाशक पुरुषों के वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या को बहुत कम कर देता है तथा स्त्रियों में वक्ष कैंसर को पैदा करता है। क्लोरोपायरीफॉस नामक जहरीला कीटनाशक मनुष्य के तंत्रिका तंत्र को नष्ट कर सकता है तथा दिमागी विकास को रोक देता है। इस जहरीले कीटनाशक से मनुष्य शरीर में मांसपेशियाँ अत्यंत कमजोर हो जाती है। मैलाथियान नाम के रासायनिक जहर से जन्मजात शारीरिक विकलांगता आती है तथा शरीर के किसी भी हिस्से में पक्षाघात हो सकता है। 6 अगस्त 2003 को इस विषय पर लोकसभा में काफ़ी हंगामा हुआ। लोकसभा के अनेक सदस्यों ने सरकार से मांग की, कि इस विषय पर स्पष्टीकरण दे और पूरे देश को बताये कि सच क्या है?

सराकर की ओर से जवाब देते हुए स्वस्थ एवं परिवार कल्याण मंत्री सुषमा स्वराज्य ने लोकसभा में कहा कि जल्दी ही सरकार इस विषय पर जांच करायेगी। इसी तरह 21 अगस्त 2003 को राज्यसभा में भी बहस हुई। वहाँ भी मंत्री महोदया ने इसी तरह का आश्वासन दिया। अंत में लोकसभा अध्यक्ष के निर्देश पर संयुक्त संसदी समिति गठन करने का फैसला किया गया। यह संयुक्त संसदीय समिति पेप्सी-कोक में मिले हुए कीटनाशक रसायनों की जांच करने के लिए बनाने का तय किया गया। इस तरह 22 अगस्त 2003 को सरकार द्वारा पेप्सी-कोका कोला की जाँच के लिए संयुक्त संसदीय समिति के गठन की अधिसूचना जारी की गयी। इस संसदीय समिति में 10 सांसद लोकसभा से एवं 5 सांसद राज्यसभा से लिये गये, समिति के अध्यक्ष शरद पंवार को बनाया

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