स्वदेशी भारत एवं विदेशी कंपनियों का षड़यन्त्र
Swadeshi Bharat evam Videshi Kampaniyon Ka Shadyantra
राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा
स्रोत: Swadeshi Bharat & Rajiv Dixit Lectures · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंगया। समिति में लोकसभा से अनंत कुमार, डा. सुधा यादव, रमेश चैत्रीथला, अवतार सिंह भड़ाना, के. येरत्रनायडु, ई. अहमद, रंजीत कुमार पांजा, अखिलेश यादव और अनिल बसु को लिया गया। इसी तरह समिति में राज्यसभा से एस.एस. अहलवालिया, पृथ्वीराज च्हाण, संजय निरूपम, प्रेमचन्द गुप्ता, प्रशांत चर्टजी को लिया गया। समिति को यह जांच करने की जिम्मेदारी दी गयी कि पेप्सी कोका-कोला के जो भी ब्रांड भारत में बिक रहे हैं उनमें कीटनाशक हैं या नहीं? साथ ही साथ समिति को यह जिम्मेदारी दी गयी कि सरकार को ठंडे पेयों की गुणवत्ता बनाये रखने के लिए भी सुझाव दे। इस समिति के लिए डा.एस.के.खन्ना, डा. एन.पी. अग्रिहोत्री, डा.जी. त्यागराजन को विशेषज्ञ के रूप में नियुक्त किया गया। इस समिति ने 4 फरवरी 2004 को अपनी रिपोर्ट संसद के सामने पेश की। इस रिपोर्ट को बनाने में संयुक्त संसदीय समिति के सामने कई मंत्रालय पेश हुए। देश के कई विशेषज्ञ एवं संस्थाओं की ओर से भी समिति को काफी जानकारी दी गयी।
सेंटर फॉर सायन्स एण्ड एनवायरमेंट द्वारा मई 2003 में पेप्सी एवं कोका कोला के सभी ब्रांडों की जांच की गयी। जिसमें पाया गया कि यूरोपीय मानकों की तुलना में भारतीय पेप्सी एवं कोक में 21 गुना अधिक लिन्डेन (खतरनाक रासायनिक कीटनाशक), 42 गुना अधिक डी.डी.टी. , 72 गुना अधिक क्लोरोपायरीफॉस, 196 गुना अधिक मैलाथियान उपस्थित है। सी.एस.ई. संस्था की प्रयोगशाला में अमेरिक से लाये हुए पेप्सी एवं कोकाकोला के सभी ब्रांडों की भी जांच की गयी। लेकिन इन अमरीकी नमूनों में कुछ भी रासायनिक कीटनाशक नहीं पाये गये।
संसदीय समिति के अनुसार भारत में कोका-कोला के 52 कारखाने हैं, जिनमें से 27 कारखाने कोका-कोला कंपनी के हैं तथा बाकी 25 कारखाने अन्य दूसरी भारतीय कंपनियों के हैं, लेकिन इनमें 38 कारखाने हैं जिनमें से 17 कारखाने कंपनी के स्वयं के हैं एवं 21 कारखाने अन्य दूसरी भारतीय कंपनियों के हैं, जिनमें पेप्सी-कोला के लिए उत्पादन होता है। पेप्सी एवं कोका-कोला कंपनियों द्वारा संसदीय समिति को दी गयी जानकारी के अनुसार पेप्सी एवं कोका-कोला के ठंडे पेयों की एक साल की कुल बिक्री 4000 करोड़ रुपये से अधिक है।
बहुराष्ट्रीय कंपनी का मकड़जाल
मानव समाज के लम्बे इतिहास में बहुराष्ट्रीय कम्पनियों का उदय एक ऐसी घटना है जिसने मनुष्य की जीवन शैली और अनुभव से परखे टिकाऊ मूल्यों को झकझोर दिया है। नवजात शिशु के भरपूर पोषण के लिए प्रकृति प्रदत्त माँ के स्तनपान की चिरकाल से चली आयी स्वास्थ्य परम्परा के स्थान पर बहुराष्ट्रीय कम्पनियों द्वारा 'बेबी फूड' को स्थापित करवा देना इसका एक उदाहरण मात्र है। राज्य, राष्ट्रीयता, धर्म, ईमान इन सब से ऊपर उठकर मुनाफा और आर्थिक साम्राज्य की हवस ने इन
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