भारतकोश
स्वदेशी भारत एवं विदेशी कंपनियों का षड़यन्त्र

स्वदेशी भारत एवं विदेशी कंपनियों का षड़यन्त्र

Swadeshi Bharat evam Videshi Kampaniyon Ka Shadyantra

राजीव दीक्षित / रोबिन सिराना द्वारा

स्रोत: Swadeshi Bharat & Rajiv Dixit Lectures · Swadeshi Robin Sirana · 2017 (उद्गम)

DevanagariHindipublished77 पृष्ठ

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कर रही हैं। इन बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ ने पूँजी के नाम पर कैसा मकड़जाल इस देश पर फैलाया है, इसका अनुमान दो-तीन उदाहरणों से लगाया जा सकता है।

हिन्दुस्तान लीवर ने भारत में सन् 1933 में जब व्यापार शुरू किया तब इसकी मूल कंपनी यूनीलीवर ने मात्र 24 लाख रुपये लगाये। 1933 में प्रारम्भ हुई इस कंपनी ने ऐसा जाल बिछाया कि 1990 में इसकी मूल कंपनी यूनीलीवर की शेयर पूँजी 47.59 करोड़ रुपये हो गयी। इसमें से 44.51 करोड़ रुपये की शेयर पूँजी बोनस के रूप में जुड़ी। 1975 से 1990 तक के बीच हिन्दुस्तान लीवर ने 80.18 करोड़ रुपये लाभांश के रूप में भारत से बाहर भेज दिये। यह रकम रायल्टी और तकनीकी शुल्क के अतिरिक्त हैं।

इसी तरह कॉलगेट-पामोलिव कंपनी ने सन् 1937 में मात्र 1.5 लाख रुपये से अपना कारोबार शुरू किया। 1989 के आते-आते अमरीकी कंपनी कॉलगेट-पामोलिव की शेयर पूँजी बढ़कर 12.57 करोड़ रुपये हो गयी। इसमें 12.56 करोड़ रुपये की पूँजी बोनस शेयर के रूप में जुड़ी। कॉलगेट-पामोलिव कंपनी 1977 से 1989 के बीच में 18.42 करोड़ रुपये लाभांश के रूप में भारत से अमरीका ले गयी।

सामान्यतः बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ जितनी पूँजी लेकर आती हैं, उससे कई गुना अधिक पूँजी तो वे एक ही वर्ष में देश के बाहर भेज देती हैं। उदाहरण – गुडईयर कंपनी ने भारत में 1 करोड़ रुपये पूँजी का निवेश किया। लेकिन 1989 में गुडईयर ने 7.33 करोड़ रुपया भारत से बाहर मुनाफे के रूप में भेज दिया।

वर्षविदेशी पूँजी निवेशभारत से बाहर गया धन
1981108 करोड़ रुपये114 करोड़ रुपये
1982628 करोड़ रुपये641 करोड़ रुपये
1983618 करोड़ रुपये590 करोड़ रुपये
19841130 करोड़ रुपये1169 करोड़ रुपये
19851260 करोड़ रुपये1181 करोड़ रुपये
19861066 करोड़ रुपये1265 करोड़ रुपये
19871077 करोड़ रुपये1193 करोड़ रुपये
1991 से 199525,479 करोड़ रुपये34,240 करोड़ रुपये

स्रोत - रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया रिपोर्ट

उच्च विदेशी तकनीक का झूठ

विदेशी उच्च तकनीक को लाने के नाम पर बहुराष्ट्रीय कंपनियों को व्यापार की खुली लूट दी जाती हैं। भारत में आने वाली सभी बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने विदेशी उच्च तकनीक देने के समझौते पर हस्ताक्षर कर रखे हैं। लेकिन वास्तव में अधिकांश बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ ऐसे क्षेत्रों में व्यापार

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