तैत्तिरीय आरण्यक (कृष्ण यजुर्वेद - सायणभाष्य व हिन्दी अनुवाद)
Taittiriya Aranyaka Hindi
महर्षि वैशम्पायन द्वारा
स्रोत: Taittiriya Aranyaka with Sayana Bhashya and Hindi Translation (उद्गम)
पृष्ठ 626, कुल 940 में से
संदर्भ में पढ़ें५ प्रपाठके ६ अनुवाकः । ६१३
ह । प्रा॒णो वै गो॒पाः । प्रा॒णमे॒व प्र॒जासु॑ वि॒र्या॑त- यति^(१०) । ^(११)अप॑श्यं गो॒पामित्या॑ह । अ॒सौ वा आ॑- दि॒त्यो गो॒पाः । स हीमाः प्र॒जा गो॒पाय॑ति । तमे॒व प्र॒जानां॑ गो॒प्तारं॑ कुरुते^(११) । ^(१२)अनि॑पद्यमानमि- त्याह ॥ ४ ॥
न ह्येष नि॒पद्य॑ते^(१२) । ^(१३)आ च॒ परा॑ च प॒थि- भि॒श्चर॑न्त॒मित्या॑ह । आ च॒ ह्येष परा॑ च प॒थिभि॒- श्चर॑ति^(१३) । ^(१४)स स॒ध्रीचीः॒ स विषू॑ची॒र्वसा॑न इ- त्या॑ह । स॒ध्रीची॑श्च॒ ह्येष विषू॑चीश्च वसा॑नः प्र॒जा अ॒भिविपश्य॑ति^(१४) । ^(१५)आवे॑रीवर्त्ति॒ भुव॑नेष्व॒न्तरित्या॑- ह । आ ह्येष वरी॑वर्त्ति॒ भुव॑नेष्व॒न्तः^(१५) । ^(१६)ऋ॒चं प्रा- वी॑र्मधुमा॒ध्वीभ्यां॑ मधुमा॒र्ध्वीभ्या॒मित्या॑ह । वा॒स॒न्ति- कावे॒वास्मा॑ ऋ॒तू क॑ल्पयति^(१६) । ^(१७)समि॒द्धिर॒ग्निना॑ गतेत्या॑ह ॥ ५ ॥
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