तैत्तिरीय आरण्यक (कृष्ण यजुर्वेद - सायणभाष्य व हिन्दी अनुवाद)
Taittiriya Aranyaka Hindi
महर्षि वैशम्पायन द्वारा
स्रोत: Taittiriya Aranyaka with Sayana Bhashya and Hindi Translation (उद्गम)
पृष्ठ 627, कुल 940 में से
संदर्भ में पढ़ें६१४ तैत्तिरीये आरण्यके
ग्रै॒ष्मावे॒वास्मा॑ ऋ॒तू क॑ल्पयति⁽१७⁾ । ⁽१८⁾सम॒ग्निर॒ग्नि- ना॑ गतेत्याह॑ । अ॒ग्निर्च्यैवैषोऽग्निना॑ स॒ङ्गच्छ॑ते⁽१८⁾ । ⁽१९⁾स्वाहा॑ सम॒ग्निस्तप॑सा गतेत्याह॑ । पूर्व॑मे॒वादि॑तं । उत्त॑रेणाभिगृ॑णाति⁽१९⁾ । ⁽२०⁾ध॒र्त्ता दि॒वो वि॑भा॒सि रज॑सः पृथि॒व्या इत्या॑ह । वा॒र्षि॒कावे॒वास्मा॑ ऋ॒तू क॑ल्पयति ⁽२०⁾ । ⁽२१⁾हृ॒दे त्वा मन॑से त्वेत्या॑ह । शा॒र॒दावे॒वास्मा॑ ऋ॒तू क॑ल्पयति⁽२१⁾ ॥ ६ ॥
⁽२२⁾दि॒वि दे॒वेषु॒ होत्रा॑ य॒च्छेत्या॑ह । होत्रा॑भिरे॒वै- मान् लो॒कान्त्सन्द॑धाति⁽२२⁾ । ⁽२३⁾विश्वा॑सां भुवां पत॒ इत्या॑ह । है॒म॒न्ति॒कावे॒वास्मा॑ ऋ॒तू क॑ल्पयति⁽२३⁾ । ⁽२४⁾दे॒व॒श्रूस्त्वं दे॑व घर्म दे॒वान् पा॒हीत्या॑ह । शै॒शि॒रावे॒- वास्मा॑ ऋ॒तू क॑ल्पयति⁽२४⁾ । ⁽२५⁾तपो॒जां वाच॑म॒स्मे नि- य॑च्छ दे॒वायुव॒मित्या॑ह । या वै मेध्या॒ वाक् । सा त॑पो॒जा । तांमे॒वाव॑रुन्धे⁽२५⁾ ॥ ७ ॥
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