भारतकोश
तैत्तिरीय आरण्यक (कृष्ण यजुर्वेद - सायणभाष्य व हिन्दी अनुवाद)

तैत्तिरीय आरण्यक (कृष्ण यजुर्वेद - सायणभाष्य व हिन्दी अनुवाद)

Taittiriya Aranyaka Hindi

महर्षि वैशम्पायन द्वारा

स्रोत: Taittiriya Aranyaka with Sayana Bhashya and Hindi Translation (उद्गम)

DevanagariHindipublished940 पृष्ठ

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७ प्रपाठके ६ अनुवाकः। ७२६

वाव सर्वाणि॒ ज्योतीꣳ॑षि महीयन्ते। भूरिति॒ वा ऋच॑:। भुव॒ इति॒ सामानि॑। सुव॒रिति॒ यजूं॑षि ॥ २॥

मह॒ इति॒ ब्रह्म॑। ब्रह्म॑णा॒ वाव सर्वे॑ वे॒दा मही॑यन्ते। भूरिति॒ वै प्राण॑:। भुव॒ इत्य॑पानः॑। सुव॒रिति॑ व्यानः॑। मह॒ इत्यन्न॑म्। अन्ने॑न॒ वाव सर्वे॑ प्रा॒णा म॑हीयन्ते। ता वा ए॒ताश्चत॑स्रश्चतु॒र्द्धा। चत॑स्रश्चतस्रो॒ व्याहृ॑तयः। ता यो वे॑द॑॥ स वे॑द॒ ब्रह्म॑। सर्वे॑ऽस्मै दे॒वा ब॒लिमाव॑हन्ति ॥ ३॥

अ॒सौ लो॒कः, यजूं॑षि, वे॒द, दे॒ च॑ ॥ अनु० ५ ॥


अथ षष्ठोऽनुवाकः।

स य ए॒षोऽन्त॑र्हृदय आका॒शः। तस्मि॑न्न॒यं पुरु॑षो मनो॒मय॑:। अ॒मृ॑तो हिर॒ण्मय॑:। अन्त॑रेण ता॒लुके॑। य ए॒ष स्तन॑ इवाव॒लम्ब॑ते। सेन्द्र॑योनिः। यत्रा॒ऽसौ के॒शान्तो॑ वि॒वर्त्त॑ते। व्यपो॒ह्य॑ शीर्षकपा॒ले। भूरित्य॒ग्नौ प्रति॑तिष्ठति। भुव॒ इति॑ वा॒यौ ॥ १॥

सुव॒रित्या॑दि॒त्ये। मह॒ इति॒ ब्रह्म॑णि। आ॒प्नोति॑ स्वारा॑ज्यम्। आ॒प्नोति॒ मन॑स॒स्पति॑म्। वाक्प॑ति॒श्चक्षु॑ष्पतिः। श्रोत्र॑पतिर्विज्ञान॑पतिः। ए॒तत् ततो॑ भवति। आका॒श-

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