भारतकोश
तैत्तिरीय आरण्यक (कृष्ण यजुर्वेद - सायणभाष्य व हिन्दी अनुवाद)

तैत्तिरीय आरण्यक (कृष्ण यजुर्वेद - सायणभाष्य व हिन्दी अनुवाद)

Taittiriya Aranyaka Hindi

महर्षि वैशम्पायन द्वारा

स्रोत: Taittiriya Aranyaka with Sayana Bhashya and Hindi Translation (उद्गम)

DevanagariHindipublished940 पृष्ठ

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६१८ तैत्तिरीये आरण्यके

मा नौ॑ म॒हान्त॑मु॒त मा नौ॑ अ॒र्भ॒कं मा न॒ उक्ष॑न्तमु॒त मा न॑ उक्षि॒तं । मा नौ॑ बधीः पि॒तरं॒ मोत मा॒तरं॑ प्रि॒या मा न॑स्त॒नुवो॑ रुद्र रीरिषः ॥ अनु० ५२ ॥

मा न॑स्तो॒के तन॑ये॒ मा न॒ आयु॑षि॒ मा नो॒ गोषु॒ मा नो॒ अश्वे॑षु रीरिषः । वी॒रान्मानो॑ रुद्रभामि॒तो ब॑धीर्ह॒वि- ष्म॑न्तो नम॑सा विधेम ते ॥ अनु० ५३ ॥

प्रजा॑पते॒ न त्वदे॒तान्य॒न्यो विश्वा॑ जा॒तानि॒ परि॒ता ब॑भूव । यत्का॑मास्ते जु॒हुमस्तन्नो॑ अस्तु व॒यᳵ स्या॑म॒- पत॑यो रयी॒णां ॥ अनु० ५४ ॥

स्व॒स्ति॒दा वि॒शस्पति॑र्वृत्र॒हा विमृधो॑ व॒शी । वृषेन्द्॑रः पु॒र ए॑तु नः स्वस्ति॒दा अ॑भयङ्क॒रः ॥ अनु० ५५ ॥

त्र्य॑म्बकं यजामहे सुग॒न्धिं पु॑ष्टि॒वर्धन॑म् । उ॒र्वा॒रु॒कमि॑व॒ बन्ध॑नान् मृ॒त्योर्मु॑क्षीय॒ मामृता॑त् ॥ अनु० ५६ ॥

ये ते॑ स॒हस्र॑म॒युतं॒ पाशा॒ मृत्यो॒ मर्त्या॑य॒ हन्त॑वे । तान् य॒ज्ञस्य॑ मा॒यया॒ सर्वा॒नव॑ यजामहे ॥ अनु० ५७ ॥