भारतकोश
तैत्तिरीयोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

तैत्तिरीयोपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Taittiriya Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished261 पृष्ठ

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पृष्ठ 65

अनु० ८ ] शाङ्करभाष्यार्थ ५९ चेति कृतमुक्तमोमित्यनुकरोत्य- | इस प्रकार किये हुए कथनको सुनकर दूसरा पुरुष [उसको न्यः । अत ओङ्कारोऽनुकृतिः । स्वीकृत करते हुए] 'ॐ' ऐसा अनुकरण करता है । इसलिये ह स्म वा इति प्रसिद्धार्थव- ओंकार अनुकृति है । 'ह' 'स्म' और 'वै'—ये निपात प्रसिद्धिके सूचक द्योतकाः । प्रसिद्धमोङ्कारस्यानु- हैं; क्योंकि ओंकारका अनुकृतित्व तो प्रसिद्ध ही है । कृतित्वम् । अपि च 'ओ श्रावय' इति | इसके सिवा 'ओ श्रावय' इस प्रकार प्रेरणापूर्वक याज्ञिकलोग प्रैषपूर्वकमाश्रावयन्ति । तथोमिति | प्रतिश्रवण कराते हैं । तथा 'ॐ' ऐसा कहकर सामगान करनेवाले सामानि गायन्ति सामगाः । सामका गान करते हैं । शस्त्र शंसन करनेवाले भी 'ॐ शोम्' ॐशोमिति शस्त्राणि शंसन्ति शस्त्र- ऐसा कहकर शस्त्रोंका पाठ करते हैं । तथा अध्वर्युंलोग प्रतिगरके शंसितारोऽपि । तथोमित्यध्वर्युः प्रति 'ॐ' ऐसा उच्चारण करते प्रतिगरं प्रतिगृणाति । ओमिति हैं । 'ॐ' ऐसा कहकर ब्रह्मा अनुज्ञा देता है अर्थात् प्रेरणापूर्वक ब्रह्मा प्रसौत्यनुजानाति प्रैषपूर्व- आश्रवण करता है; और 'ॐ' कहकर वह अग्निहोत्रके लिये आज्ञा कमाश्रावयति । ओमित्यग्नि- देता है । अर्थात् यजमानके यों कहनेपर कि 'मैं हवन करता हूँ' होत्रमनुजानाति । जुहोमीत्युक्त वह 'ॐ' ऐसा कहकर उसे ओमित्येवानुज्ञां प्रयच्छति । अनुज्ञा देता है ।

CC-0 Pt. Chakradhar Joshi and Sons, Dev Prayag. Digitized by eGangotri