तन्त्रसार (महामाहेश्वर अभिनवगुप्त - तन्त्रालोक का प्रामाणिक सार-संग्रह सटीक)

तन्त्रसार (महामाहेश्वर अभिनवगुप्त - तन्त्रालोक का प्रामाणिक सार-संग्रह सटीक)
Tantrasara of Mahamaheshvara Abhinavagupta with Commentary
महामाहेश्वर अभिनवगुप्त द्वारा
DevanagariHindipublished294 पृष्ठ
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२६ तन्त्रसार-अभिनवगुप्त [ आ. ४ इअ दढनिच्छअ णिअ लिअ हिअअह फुरइ णाम कह जिस्स परतत्तउ ॥ परसिवतरणिकिरण-दढपातविकासिअ हिअअ कमलए । सरहस्स फुरिअ णिअ अइसुन्दरपरिमलबोहकरमए ॥ हतं सिवणाहु निहिल जअतत्त सुनिब्भरओत्ति विहुरी । फुरइ विमरिसभमरि पपलाअ णिअ लच्छि विभइरी ॥ इति श्रीमद्भिनव गुप्ताचार्य विरचिते तन्त्रसारे शाक्तोपायप्रकाशनं नाम चतुर्थ माह्निकम् ।