तन्त्रसार (महामाहेश्वर अभिनवगुप्त - तन्त्रालोक का प्रामाणिक सार-संग्रह सटीक)
Tantrasara of Mahamaheshvara Abhinavagupta with Commentary
महामाहेश्वर अभिनवगुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंआ. ४ ] तन्त्रसार-अभिनवगुप्त [ २७ शाक्तोपाय इन उपायों में जब विकल्प¹ का संस्कार आगे² उल्लिखित स्वरूप में प्रवेश करने के लिए किया जाता है, तब सत् तर्क सदागम और सद्गुरु के उपदेश पूर्वक भावना के क्रम की उपयोगिता दिखाई पड़ती है। क्योंकि विकल्प के कारण ही पशुजीव अपने को बद्ध जैसा अभिमान³ करता है। यही अभिमान संसार रूप बन्धन का कारण है, इसलिए इसके प्रतियोगी विकल्प का उदय ही संसार के कारणरूपी विकल्प का नाश करता है और अभ्युदय⁴ का कारण बन जाता है। यह (शुद्ध विकल्प) इस प्रकार है—शिवतक सब प्रकार परिच्छिन्न-स्वभाव वाले तत्त्वों से जो उत्तीर्ण (परे) अपरिच्छिन्न संविन्मात्ररूप (अखण्ड प्रकाश) हैं वही परमार्थ है, वही वस्तु व्यवस्थापक है, वही विश्व का ओजः है। उन्हीं के द्वारा विश्व प्राणमय है, मैं भी वही हूँ इसलिए मैं विश्वोत्तीर्ण १. विकल्प दो प्रकार हैं, एक शुद्ध और दूसरा अशुद्ध है। शुद्ध विकल्प परमार्थ प्राप्ति का सहायक है और अशुद्ध विकल्प जीवों को संसार की ओर ढकेलता है। अशुद्ध विकल्प के कारण आत्मा अपने को संकुचित रूप में ग्रहण करता है। २. अन्य प्रकार गुणों का आधान करना ही संस्कार शब्द का तात्पर्य है। जिसे स्वरूप कहा जाता है वह स्वभाव है जो निर्विकल्प रूप है। बारम्बार उस स्वभाव के सम्बन्ध में श्रवण, चिन्तन और मनन होने से विकल्प का संस्कार होता है। प्राथमिक स्थिति में विकल्प की शुद्धि स्फुट न होकर अस्फुट रहती है, उसके अनन्तर स्फुटतम स्थिति का उदय होता है। यह याद रखने योग्य है कि परमतत्त्व विकल्पों का विषय नहीं है, शुद्ध विकल्पों से अशुद्ध द्वैतवासना की निवृत्ति होती है, परमतत्त्व के प्रकाशन में उसकी कोई कारणता नहीं है। विकल्पों के यथावत संस्कार होने पर वही शुद्ध अविकल्पक संविद् रूप में प्रकाशित होता है। ३. अनादिकाल से प्रत्येक जीव के हृदय में 'मैं बद्ध हूँ' इस प्रकार सुदृढ़ धारणा वर्तमान है, इस प्रकार बद्धमूल धारणा के कारण वह संसारी जीव है, यही अभिमान है। ४. 'मैं बद्ध हूँ' इस प्रकार बद्धमूल धारणा के प्रतिकूल विचार ही संसार के कारणरूपी विकल्पों के नाश करने में सहायक है। उस प्रकार शुद्ध विकल्प का स्वरूप 'स च एवं रूपः' इस प्रकार कथन से प्रदर्शित किया गया है।