भारतकोश
तन्त्रसार (महामाहेश्वर अभिनवगुप्त - तन्त्रालोक का प्रामाणिक सार-संग्रह सटीक)

तन्त्रसार (महामाहेश्वर अभिनवगुप्त - तन्त्रालोक का प्रामाणिक सार-संग्रह सटीक)

Tantrasara of Mahamaheshvara Abhinavagupta with Commentary

महामाहेश्वर अभिनवगुप्त द्वारा

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आ. ५ ] तन्त्रसार-अभिनवगुप्त [ ४९ किसी-किसी का विकल्प बिना कोई उपाय से पूर्णता को प्राप्त करता है, और किसी का उपाय से संस्कार प्राप्त कर लेता है। वे उपाय भी नाना प्रकार है। बुद्धि प्राण तथा शरीर में उसके बाद बाहर संकुचित रूप में इसका निर्णय किया गया है, लेकिन परमफल की प्राप्ति के विषय में इनकी कोई भिन्नता नहीं है। इति तन्त्रसार पञ्चम आह्निक। ४