तन्त्रसार (महामाहेश्वर अभिनवगुप्त - तन्त्रालोक का प्रामाणिक सार-संग्रह सटीक)

तन्त्रसार (महामाहेश्वर अभिनवगुप्त - तन्त्रालोक का प्रामाणिक सार-संग्रह सटीक)
Tantrasara of Mahamaheshvara Abhinavagupta with Commentary
महामाहेश्वर अभिनवगुप्त द्वारा
DevanagariHindipublished294 पृष्ठ
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आ. ७ ] तन्त्रसार-अभिनवगुप्त [ ६९ सादाख्ये पञ्चकमिति अष्टादशभुवनिका शान्ता । अध्वानमिमं सकलं देहे प्राणेऽथ धियि महानभसि ॥ संविदि च परं पश्यन्पूर्णत्वाद्भैरवोभवति ॥ • परमेसरसासणमुणिरूइउ सुणिविमअलअद्धाणउ । झहुज्झतिसरोरिपवणि संवेअ णिअपेक्खन्तउ पहुरइ परिउण्णु ॥ • इति श्रीमदभिनवगुप्ताचार्यविरचिते तन्त्रसारे देशाध्वप्रकाशनं नाम सप्तममाह्निकम् ॥ ७ ॥