तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)
Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary
आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा
DevanagariHindipublished177 पृष्ठ
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अध्याय - २ नारकसम्मूर्च्छिनो नपुंसकानि ॥५०॥ [ नारकसम्मूर्च्छिनो ] नारकी और सम्मूर्च्छन जन्म वाले [ नपुंसकानि ] नपुंसक होते हैं। The infernal beings and the spontaneously generated are of the neuter sex. न देवाः ॥५१॥ [ देवाः ] देव [ न ] नपुंसक नहीं होते, अर्थात् देवों के पुरुषलिंग और देवियों के स्त्रीलिंग होता है। The celestial beings are not (of neuter sex). शेषास्त्रिवेदाः ॥५२॥ [ शेषाः ] शेष के गर्भज मनुष्य और तिर्यंच [ त्रिवेदाः ] तीनों वेद वाले होते हैं। The rest are of three sexes (signs). 34