तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)
पण्डित तेनाली रामकृष्णन / लोक संकलन द्वारा
स्रोत: तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ) · भारतीय लोक साहित्य संकलन · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंहै। इसका उपयोग अपनी और स्वजन-परिजनों की भलाई के लिए करना।” सभा विसर्जित होने के पश्चात् महाराज कृष्णदेव राय ने तेनाली राम से पूछा, “तेनाली राम! तुमने पिंडों का रहस्य कैसे सुलझा लिया? दोनों पिंड बिलकुल एक जैसे थे, फिर उन्हें छुए बिना तुमने कैसे जान लिया कि इनमें से ठोस कौन है और कौन-सा पिंड खोखला है?” तेनाली राम ने हँसते हुए कहा, “इसमें कोई रहस्य सुलझाने जैसी बात नहीं है महाराज! खोखला पिंड हल्का होता है और ठोस पिंड भारी। पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण शक्ति हर वस्तु को अपनी ओर खींचती है। अलगनी पर चेन से लटकाए गए दोनों पिंडों को मैंने गम्भीरता से देखा। ठोस पिंड को लटकानेवाले चेन में तनाव अधिक था तथा रस्सी के उस भाग में खिंचाव भी अधिक था जिस भाग में ठोस स्वर्ण-पिंड लटकाया गया था। इस खिंचाव के कारण ठोस पिंड थोड़ा नीचे आ गया था। खोखला पिंड थोड़ा ऊपर था और उसे लटकानेवाली जंजीर में वैसा तनाव भी नहीं था जैसा कि ठोस पिंड लटकानेवाली जंजीर में था।” उस दिन महाराज ने फिर तेनाली राम को अपने आलिंगन में ले लिया और बोले, “तेनाली राम! तुम सचमुच बुद्धिमान हो।”