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तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

पण्डित तेनाली रामकृष्णन / लोक संकलन द्वारा

स्रोत: तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ) · भारतीय लोक साहित्य संकलन · 1950 (उद्गम)

DevanagariHindipublished118 पृष्ठ

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किन्तु प्रजा सुखी नहीं थी। निषेधाज्ञा के कारण 'सप्तद्वीप नवखंड' में व्यापारियों का आना- जाना कम होने लगा। पड़ोसी राज्यों में जहाँ कहीं भरे सप्तद्वीप-नवखंड से वनोपजों का निर्यात होता था वहाँ अब सप्तद्वीप नवखंड के व्यापारियों का महत्त्व कम होने लगा। गुप्तचर संगठनों से राज्य की लगातार कम होती साख की सूचना मिलने पर महाराज विचित्र भानु को समझ में नहीं आया कि उसके राज्य के प्रति पड़ोसी राज्यों के व्यवहार में आए परिवर्तन का कारण क्या है। उसने मन-ही-मन तय कर लिया कि वह इस परिवर्तन का कारण जानने के लिए पड़ोसी राज्यों में अपने गुप्तचरों का एक सर्वेक्षण दस्ता भेजेगा। यह दस्ता अन्य बातों के अलावा यह भी पता करेगा कि वहाँ बसे सभी राज्यों में सबसे लोकप्रिय शासक कौन है तथा सबसे वैभव-सम्पन्न राज्य कौन-सा है? अपने इस निर्णय तक पहुँचने में महाराज विचित्र भानु ने अपने मंत्रियों, दरबारियों अथवा प्रजाजनों से कोई सलाह लेने की आवश्यकता भी नहीं महसूस की। अपनी सनक में वह गुप्त सूचनाएँ प्राप्त करता रहा। 'सर्वेक्षण दस्ता' तैयार करने के मंसूबे को अमली जामा पहनाने के लिए उसने अपने गुप्तचरों को बुलाया और उनसे बातचीत करते हुए कुछ गुप्तचरों को पड़ोसी राज्यों के आन्तरिक सर्वेक्षण के लिए भेज दिया। इन गुप्तचरों को निर्देश मिला कि वे सम्बद्ध राज्य में जाएँ और वहाँ सामान्य नागरिक की तरह रहकर यह जानने का प्रयत्न करें कि वहाँ की प्रजा और राजा के बीच कैसा सम्बन्ध है। क्या उस राज्य की प्रजा खुशहाल है? क्या प्रजा के बीच राजा लोकप्रिय है? ऐसे ही अनेक प्रश्नों का उत्तर जानने के लिए गुप्तचरों के सर्वेक्षण दस्ते के सदस्य आस-पास के राज्यों में प्रवेश कर गए। उन्हें अधिकतम छः माह की अवधि में अपना सर्वेक्षण कार्य पूरा कर लेने का निर्देश मिला था। छः माह की अवधि पूर्ण हुई। 'सप्तद्वीप नवखंड' के गुप्तचर पड़ोसी राज्यों से लौटे। महाराज विचित्र भानु को गुप्तचरों ने एकत्र की गई सूचनाएँ सौंपीं। इन सूचनाओं के अध्ययन से उसे ज्ञात हुआ कि पड़ोसी राज्य विजयनगर सबसे वैभवशाली राज्य है। वहाँ की प्रजा खुशहाल है और वहाँ के राजा महाराज कृष्णदेव राय अपने राज्य में तो सर्वाधिक लोकप्रिय हैं ही, आस-पास के राज्यों में उनके जैसा लोकप्रिय राजा कोई नहीं है। सर्वेक्षण दस्ते से मिली सूचनाओं के निष्कर्ष से महाराज विचित्र भानु आहत हुआ। इन सूचनाओं से उसके अभिमान को ठेस पहुँची थी। अब उन पर यह जानने की सनक सवार हो गई कि विजयनगर में ऐसा क्या है जिससे वहाँ के लोग खुशहाल हैं? सर्वेक्षण दस्ता एक बार फिर सक्रिय हो उठा। कुछ दिनों में ही महाराज विचित्रभानु को सर्वेक्षण दस्ते का सर्वेक्षण-निष्कर्ष प्राप्त हुआ कि विजयनगर के लोग परिश्रमी हैं। प्रायः प्रत्येक घर में रोजगार का कोई न कोई परम्परागत साधन है। वहाँ कपड़े बुननेवालों का गाँव है तो मिट्टी के बर्तन बनानेवालों का गाँव भी। लोहे का काम करनेवालों का गाँव है तो सोना और चाँदी का काम करनेवालों का भी। पूरे विजयनगर में कुटीर और लघु उद्योगों का जाल बिछा हुआ है। खेत-खलिहानों में काम करनेवाले लोगों के पास भी कोई न कोई

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