तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)
पण्डित तेनाली रामकृष्णन / लोक संकलन द्वारा
स्रोत: तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ) · भारतीय लोक साहित्य संकलन · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंपारम्परिक धन्धा अवश्य है। विजयनगर के सभी गाँवों में एक साम्य यह भी है कि वहाँ के प्रत्येक परिवार के पास दुधारू पशु उपलब्ध हैं। गाय, भैंस, बकरी हर परिवार में है इसलिए दूध, दही, घी, मक्खन आदि की बहुतायत है। विजयनगर के महाराज कृष्णदेव राय के पास भी एक समृद्ध गोशाला है। दुग्ध-उत्पादों को विजयनगर के वैभव का मुख्य आधार माना जाता है। दुग्ध-उत्पादों की प्रचुरता और उपलब्धता से ही विजयनगर के निवासी हृष्ट-पुष्ट-तन्दुरुस्त हैं। वहाँ ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो हाथियों से भी टक्कर लेने की सामर्थ्य रखते हैं। महाराज विचित्र भानु ने जब सर्वेक्षण दल का यह निष्कर्ष सुना तब चिन्तित हो उठा। उसने तो स्वयं को ही सबसे सामर्थ्यवान राजा मान लिया था। सर्वेक्षण दल से विजयनगर के महाराज कृष्णदेव राय के बारे में उसे जो जानकारियाँ मिलीं उससे वह उद्वेलित हो उठा। स्वयं को सबसे प्रतापी मानने का दंभ पालनेवाले कभी भी अपने आगे किसी अन्य की प्रशंसा स्वीकार नहीं कर पाते हैं। महाराज विचित्र भानु का भी यही हाल था। उसमें विज यनगर की समृद्धि के प्रति ईर्ष्या का भाव जाग्रत् हुआ। ईर्ष्या में पड़े सामान्य मनुष्य की तरह वह भी तिल-तिल कर जलने लगा। अन्ततः उसने अपने गुप्तचर संगठन को निर्देश दिया कि संगठन के सदस्य कोई ऐसी तरकीब अपनाएँ जिससे विजयनगर के लोग अपनी गायों को शीघ्रता से बेचने का निर्णय लेने के लिए बाध्य हो जाएँ। और इस प्रकार ‘सप्तद्वीप नवखंड’ का गुप्तचर संगठन पड़ोसी राज्य विजयनगर में सक्रिय हो गया। एक दिन महाराज कृष्णदेव राय अपने दरबार में बैठे हुए थे। आम दिनों की तरह दरबार में काम-काज चल रहा था। दरबार में चर्चा चल रही थी कि विजयनगर के गाँवों में इन दिनों एक ही चर्चा चल रही है कि कोई भीषण संक्रामक रोग से आस-पास के राज्यों में मवेशी मर रहे हैं। आम तौर पर यह रोग हृष्ट-पुष्ट गायों पर तेजी से असर डालता है। बैल और बछड़ों पर कम। ग्रामीण इस संक्रामक रोग के बारे में सुनकर आतंकित हो उठे हैं कि कहीं इस रोग से प्रभावित होकर उनकी गायें न मर जाएँ! महाराज कृष्णदेव राय के कानों में जब यह बात पड़ी तो उन्होंने संक्रामक रोग की चर्चा करनेवाले दरबारी को टोक दिया, “सुकेतु! फिर से बोलना, गायों को कौन-सा रोग लग रहा है? ग्रामीणों में कैसा आतंक हैं?” महाराज कृष्णदेव राय में अपनी प्रजा के प्रति संवेदनशीलता थी इसलिए प्रजा से जुड़ी छोटी-से-छोटी बात पर वे ध्यान देते थे। उनके टोकते ही उनका दरबारी सुकेतु अपने स्थान से उठा और बोला, “महाराज! मेरे गाँव के लोग डरे हुए हैं कि उनकी गायों को कोई छूत का रोग नहीं लग जाए! पूरे गाँव में इन दिनों इस बात की चर्चा हो रही है कि एक रोग बहुत तेजी से फैल रहा है। इस रोग के प्रभाव में आने के बाद गाय तुरन्त मर जाती है। और जिस गाँव में इस रोग से एक गाय मरती है तो फिर उस गाँव में ताबड़तोड़ गायों के मरने