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तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

पण्डित तेनाली रामकृष्णन / लोक संकलन द्वारा

स्रोत: तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ) · भारतीय लोक साहित्य संकलन · 1950 (उद्गम)

DevanagariHindipublished118 पृष्ठ

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का सिलसिला आरम्भ हो जाता है। यह विचित्र रोग आम तौर पर पूर्ण स्वस्थ गायों पर ही अपना प्रभाव तेजी से डालता है!” “...तो तुम यह कहना चाहते हो कि तुम्हारे गाँव में गायों की महामारी फैल गई है?” महाराज कृष्णदेव राय ने पूछा। “जी हाँ, महाराज!“ सुकेतु ने उत्तर दिया। महाराज ने इशारा करके सुकेतु को बैठ जाने का संकेत किया। सुकेतु अपने आसन पर बैठ गया। इसके तुरन्त बाद एक अन्य दरबारी ने कहा, “महाराज! इस तरह की चर्चा मेरे गाँव में भी हो रही है।” पुनः कुछ अन्य दरबारियों ने भी समान सूचना महाराज को दी। उस समय दरबार में तेनाली राम भी उपस्थित था। दरबार में हो रही चर्चाओं से महाराज कृष्णदेव राय चिन्तित हो उठे। महाराज के चेहरे पर चिन्ता की रेखाएँ देखकर तेनाली राम सक्रिय हुआ। अपने आसन से उठकर उसने सभासदों से पूछा, “क्यों भाइयो, आपमें से और किसी ने गायों की महामारी के बारे में सुना है?” कई स्वर उभरे, “मैंने! मैंने! मैंने!” तेनाली राम ने फिर एक सवाल किया, ”बन्धुओ! क्या आपमें से किसी ने महामारी से कहीं गायों को मरते देखा है?” दरबार में सन्नाटा छा गया। किसी ने तेनाली राम के इस प्रश्न का सकारात्मक उत्तर नहीं दिया। तेनाली राम की मुखमुद्रा गम्भीर हो गई। उस दिन दरबार के समापन तक महाराज और तेनाली राम दोनों गम्भीर बने रहे। महाराज चिन्तित थे कि उनके राज्य के मवेशियों पर किसी अनजाने संक्रामक रोग का खतरा मँडरा रहा है...और तेनाली राम इस घटना में किसी षड्यंत्रा की सम्भावना पर विचार कर रहा था। दरबार के समापन के बाद जब सभी सभासद लौट गए तब महाराज कृष्णदेव राय ने तेनाली राम से पूछा, “तेनाली राम! क्या तुमने कभी ऐसे रोग के बारे में सुना है जिसका प्रकोप केवल स्वस्थ और हृष्ट-पुष्ट गायों पर ही होता हो? इतनी अवस्था हो जाने के बाद भी मैंने पहले ऐसी महामारी के बारे में नहीं सुना!...तुमने सुना हो तो बताओ!...यह एक गम्भीर समस्या है और इस समस्या को सुलझाना मेरा कर्तव्य है! राज-धर्म है!” महाराज की बातें सुनकर तेनाली राम ने कहा, “नहीं महाराज! इससे पहले मैंने कभी