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तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

पण्डित तेनाली रामकृष्णन / लोक संकलन द्वारा

स्रोत: तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ) · भारतीय लोक साहित्य संकलन · 1950 (उद्गम)

DevanagariHindipublished118 पृष्ठ

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इस तरह की किसी महामारी के बारे में नहीं सुना है लेकिन आप चिन्ता नहीं करें, शीघ्र ही सच्चाई सामने आ जाएगी। यदि कोई रोग है तो उसका निदान राजवैद्य निकाल ही लेंगे...” “...और हम हाथ पर हाथ धरे तब तक बैठे रहें?” महाराज कृष्णदेव राय ने कुपित स्वर में पूछा। “नहीं महाराज! मुझ पर भरोसा करें। मैं सक्रिय हो चुका हूँ। तब ही मैंने निवेदन किया है कि शीघ्र ही सच्चाई सामने आ जाएगी। अभी मैं इससे अधिक कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं हूँ।” तेनाली राम ने विनम्रता के साथ महाराज कृष्णदेव राय से कहा। तेनाली राम का उत्तर सुनकर महाराज मौन हो गए। वह उनसे आज्ञा लेकर अपने घर वापस आ गया। वह चिन्तित था। पता नहीं क्यों, उसका दिमाग यह स्वीकार नहीं कर पा रहा था कि कोई ऐसा रोग भी होता है जो केवल स्वस्थ गायों को अपनी चपेट में लेकर पलों में उसे मार डालता है ..ऐसा तो सर्पदंश में भी नहीं होता! दूसरे दिन महाराज कृष्णदेव राय का दरबार लगा हुआ था। सभी सभासद अपने आसनों पर विराजमान थे। महाराज कुछ विलम्ब से आए। दरबार में चर्चा चल रही थी कि विजयनगर के कुछ गाँवों में मवेशियों के व्यापारी घूम रहे हैं और ग्रामीण बहुत कम मूल्य लेकर उनसे गायें बेच रहे हैं। महाराज कृष्णदेव राय तक जब यह बात पहुँची तब उन्होंने पश्चात्ताप की मुद्रा में कहा, "आह! अब यही होना था...!” विवश से महाराज कृष्णदेव राय ने तेनाली राम के आसन की ओर देखा। आसन रिक्त था। तेनाली राम दरबार में उपस्थित नहीं था। महाराज को एक कचोट-सी हुई। वे इस समय तेनाली राम की आवश्यकता तीव्रता से महसूस कर रहे थे। दरबार में कामकाज चल रहा था। महाराज कृष्णदेव राय बार-बार तेनाली राम के आसन की ओर देख रहे थे। आसन रिक्त था। उस दिन दरबार के समापन तक तेनाली राम नहीं आया। दूसरे दिन दरबार में तेनाली राम सशस्त्रा बल के जवानों के साथ दरबार में उपस्थित हुआ। सशस्त्रा बल के जवानों ने पाँच अजनबियों को रस्सियों में जकड़कर महाराज के सामने प्रस्तुत किया। महाराज कृष्णदेव राय को जब कुछ भी समझ में नहीं आया तब पूछा, “यह सब क्या है तेनाली राम?” तेनाली राम ने उत्तर दिया, “महाराज!” यह सब एक बड़े षड्यंत्र का छोटा-सा हिस्सा है। कृपया इन गिरफ्तार लोगों को कारागार में डालने का आदेश दें। इन लोगों पर आरोप है कि ये भोले-भाले ग्रामीणों को झाँसा देकर उनकी गायें बहुत कम मूल्य पर खरीद रहे थे। इस काम में एक बड़ा गिरोह काम कर रहा है। ये लोग उसी गिरोह के सदस्य हो सकते हैं।" थोड़ी देर की चुप्पी के बाद तेनाली राम ने कहा, "महाराज! शेष बातें न्यायिक प्रक्रिया के