भारतकोश
त्रिपुरारहस्य (ज्ञान खण्ड - महर्षि दत्तात्रेय-परशुराम संवाद सान्वय सटीक)

त्रिपुरारहस्य (ज्ञान खण्ड - महर्षि दत्तात्रेय-परशुराम संवाद सान्वय सटीक)

Tripura Rahasya Jnana Khanda with Hindi Commentary

महर्षि दत्तात्रेय / भगवान् परशुराम द्वारा

DevanagariHindipublished404 पृष्ठ

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पृष्ठ 79

पञ्चमोऽध्यायः । ६५ ब्रह्माण्डभेदनं गर्भस्रावणं सुभयङ्करम् ॥ ६३ ॥ रुदितं विप्रलपितं शोचितादिविचित्रितम् । एवं श्रुत्वा सुचकितश्चान्यत्राप्यशृणोत्तथा ॥ ६४ ॥ द्वितीयसुतनीतोऽथास्थिरस्तद्भुवनं ययौ । तत्रापश्यन् मृदुस्पर्शान्यासनानि शुभानि च ॥ ६५ ॥ शयनानि च वासांसि कठिनस्पर्शकान्यपि । शीतस्पर्शानि वस्तूनि तथोष्णस्पर्शकानि च ॥ ६६ ॥ अनुष्णाशीतस्पर्शानि विचित्राण्यभिवीक्ष्य तु । हितान् दृष्ट्वा प्रमुदितो विषण्णस्त्वहितानपि ॥ ६७ ॥ अथ तृतीयतनयभवनं प्राप्य सोऽस्थिरः । अपश्यद्रुचिराकारान् भावान् विविधवर्णकान् ॥ ६८ ॥ रक्तान् श्वेतान् पीतनीलान् हरितान्पाटलानपि । धूम्रान् कडारान् कपिशान्मेचकान् कर्बुरांस्तथा ॥ ६९ ॥ स्थूलान् कृशानणून्दीर्घानायतान् वर्त्तुलांस्तथा । अर्द्धवृत्तान् दीर्घवृत्तान् सुन्दरांश्र विभीषणान् ॥ ७० ॥ ब्रह्माण्डका भयङ्कर स्फोट, गर्भस्रावका क्रन्दन तथा शोकाकुलोंका प्रलाप आदि विचित्र शब्द सुनकर वह बड़ा चकित हुआ । इसी प्रकार और भी बहुत-से शब्द सुने ॥ ६३-६४ ॥ एक बार दूसरे पुत्रके१ ले जानेसे वह उसके घर भी गया । वहाँ उसने कोमल स्पर्शवाले सुन्दर आसन, शयन ( बिछौने ) और वस्त्र देखे । इसी प्रकार कठिन, शीत और उष्ण स्पर्शवाली वस्तुएँ भी देखीं ॥ कोई वस्तुएँ ऐसी भी थीं जिनका स्पर्श न अधिक उष्ण था न शीत । इस प्रकार तरह-तरह की वस्तुएँ देखकर अनुकूलोंसे उसे हर्ष हुआ और प्रतिकूलोंसे विषाद ॥ ६७ ॥ फिर उस अस्थिरने तीसरे पुत्रके२ भवनमें जाकर वहाँ अनेक रंगोंके सुन्दर-सुन्दर आकारवाले पदार्थ देखे ॥ ६८ ॥ वे पदार्थ लाल, सफेद, पीले, नीले, हरे, भूरे, धूमिल, मटियाले, सुनहरे, काले और चितकबरे इत्यादि अनेकों रंगों तथा स्थूल, कृश, अणु, दीर्घ, चौड़े, गोल आदि अनेकों आकारोंके थे । कोई गोलार्ध और कोई १. त्वगिन्द्रिय । २. चक्षुरिन्द्रिय ।

त्रिपुरारहस्य (ज्ञान खण्ड - महर्षि दत्तात्रेय-परशुराम संवाद सान्वय सटीक) · पृष्ठ 79, कुल 404 में से · BharatKosha