भारतकोश
वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System

डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा

DevanagariHindipublished353 पृष्ठ

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द्वितीय अध्याय 73 "तेभ्यस्तपस्तेभ्यस्त्रयो वेदा अजायन्ताग्नेर्ऋग्वेदो, वायोर्यजुर्वेदः सूर्यात्सामवेदः।" (श०ब्रा० ११/५२/३) अर्थात् उन सातों से तीन वेद उत्पन्न हुए, अग्नि से ऋग्वेद उत्पन्न हुआ, वायु से यजुर्वेद उत्पन्न हुआ तथा सूर्य से सामवेद की उत्पत्ति हुई। तथा "अग्निवायुरविभ्यस्तु त्रयं ब्रह्म सनातनम्। दुदोह यज्ञसिद्ध्यर्थमृग्यजुः सामलक्षणम्॥" (मनु० २/१५१) इस प्रकार भारतीय परम्परानुसार वेदों की उत्पत्ति जगत् की संरचना के साथ हुई। (२) अर्वाचीन एवं पाश्चात्य विद्वानों का मत :- भारतीय विचारधारा तो वेदों को ईश्वरकृत मानती है किन्तु आधुनिक युग की ऐतिहासिक दृष्टि जो विकासवाद के सिद्धान्त पर विश्वास करती है, इस भारतीय विचार परम्परा को स्वीकार करने में सहमत नहीं होती। वैदिक साहित्य के अध्येता अनेक पाश्चात्य मनीषियों ने ऋग्वेद को सर्वप्राचीन मानकर उसके काल निर्धारण का प्रयत्न किया है। इन विद्वानों का विचार है कि प्रत्यक्ष तथा सबल प्रमाणों के अभाव में ऋग्वेद के समय को पूर्णतः सत्य निश्चित नहीं किया जा सकता। हो सकता है कि उस अनुमान में कतिपय शताब्दियों का अन्तर रह जाय। पाश्चात्य आलोचकों का अनुकरण करने वाले भारतीय आलोचकों ने भी वेदों के काल निर्धारण का प्रयत्न किया है तथा ये ऋग्वेद के काल को पाश्चात्य आलोचकों की अपेक्षा अधिक प्राचीन समय तक खींच ले गए। इस स्थल पर ऋग्वेद की रचना के सम्बन्ध में विभिन्न विद्वानों के मतों को उद्धृत किया जा रहा है। (३) मैक्समूलर का मत :- इंग्लैण्ड की "Sacred books of the east" नामक ग्रन्थमाला के अन्तर्गत मैक्समूलर द्वारा सम्पादित ऋग्वेद (शाकल शाखा) को प्रकाशित किया गया था। यह ग्रन्थ १८५९ ई० के लगभग प्रकाशित हुआ। इस ग्रन्थ के भूमिका भाग में मैक्समूलर द्वारा ऋग्वेद के काल को निश्चित करने का प्रयास कया गया है। इनके अनुसार ऋग्वेद की रचना १२०० वि० पूर्व में सम्पन्न हुई। अपने मत की पुष्टि करने के लिए मैक्समूलर ने कहा कि गौतम बुद्ध के समय तक वैदिकसाहित्य की रचना पूर्ण हो चुकी थी। वैदिक साहित्य को उन्होंने चार भागों

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