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वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System

डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा

DevanagariHindipublished353 पृष्ठ

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पृष्ठ 107

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द्वितीय अध्याय 79 कर दिया जाय तो वे मन्त्र अवेस्ताँ गाथाओं में परिवर्तित हो जाते हैं। इसी प्रकार यदि अवेस्ताँ का रचना काल ईसा से ८०० वर्ष पूर्व होने के बजाय कहीं १५०० वर्ष पूर्व होता तो ऋग्वेद तथा अवेस्ताँ की भाषा में नगण्य अन्तर होता। ऋग्वेदीय भाषा एवं अवेस्ताँ की भाषा का तुलनात्मक अध्ययन करने से भी यही परिणाम प्राप्त होता है कि वेदों की रचना लगभग २००० वर्ष ईसा के पूर्व में हुई होगी। ख- मैक्डानल का मत : मैक्डानल ने ऋग्वेद का निर्माण काल १३०० ई०पू० में निर्धारित किया है। मैक्डानल का कथन है कि आर्यों की दो शाखाएँ थीं— भारतीय और ईरानी। यह शाखाएँ १३०० ई०पू० में पृथक् हुई थी। अपने पृथक् होने के पहले ये शाखाएँ एक ही थी। इसी काल में आर्यों की भारतीय एवं ईरानी शाखाओं द्वारा ऋग्वेद का निर्माण किया गया। इसके ५०० वर्ष पश्चात् लगभग ८०० ई०पू० में अवेस्ताँ प्रणीत हुई। इनका कथन है कि जैकोबी के अनुसार यदि आर्यों की भारतीय एवं ईरानी शाखाओं के अलग होने को ४५०० ई०पू० में भी मान लिया जाय तो भी ३००० वर्षों तक इनकी भाषाएँ अपरिवर्तित ही रही होगी। १९०७ ई० में एशिया माइनर में उपलब्ध १४०० ई०पू० के अभिलेखों में मित्र, वरुण, इन्द्र नासत्यादि देवों का निर्देश उस समय दोनों शाखाओं के भाषा साम्य को प्रमाणित करता है। उसी समय के लगभग यदि दोनों शाखाओं के अलग होने को स्वीकार कर लिया जाय तो उसके कुछ समय पश्चात् होने वाले भाषागत परिवर्तन के अनुसार ऋग्वेद का निर्माण १३०० ई०पू० में हुआ होगा। छ- इतिहास सम्बन्धी तथ्यों का आधृत मत : अनेक भारतीय तथा पाश्चात्य विद्वानों ने इतिहास के आधार पर वेदों का रचनाकाल निर्धारित करने का प्रयत्न किया है। इनमें से प्रमुख मत निम्नलिखित हैं— क- भण्डारकर का मत : डॉ० आर० जी० भण्डारकर ने ऐतिहासिक आधार पर वेदों के रचनाकाल को निर्धारित करने का प्रयास किया। ईशावास्योपनिषद् में असुर्या शब्द आया है। यह उपनिषद् यजुर्वेद का ४०वाँ अध्याय है। भण्डारकर जी का कथन है कि यह शब्द आसीरिया का समानार्थक है। ऋग्वेद में देवताओं तथा असुरों के युद्ध का वर्णन है। अतः असीरिया (मेसोपोटामिया) के निवासी ही वेदों में बतलाए गए असुर हैं, ये २५०० ई०पू० के लगभग भारत की ओर आये थे। अतः यजुर्वेद का निर्माण काल लगभग २५०० ई०पू० में हुआ होगा। ऋग्वेद की रचना इससे भी पूर्व हुई होगी। अतः ऋग्वेद का रचनाकाल ६००० ई०पू० में कहा जा सकता है।

CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar