भारतकोश
वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System

डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा

DevanagariHindipublished353 पृष्ठ

पृष्ठ 108, कुल 353 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 108

सिकन्दर के आक्रमण के समय ग्रीक के लोगों ने राजाओं की वंशावलियों का संकलन किया था। उनके अनुसार चन्द्रगुप्त मौर्य से पूर्व १५४ राजाओं ने ४५७ वर्ष तक शासन किया था। सम्भवतः यह समय वैदिक ही था। इससे अनेक वर्षों पूर्व ऋग्वेद का निर्माण हो चुका था। इस आधार पर ऋग्वेद के निर्माण का समय ८००० ई०पू० से ६००० ई०पू० तक हो सकता है। ख- डॉ० राधाकुमुद मुखर्जी का मत : डॉ० मुखर्जी ऐतिहासिक आधार पर ऋग्वेद का समय २५०० ई०पू० मानते हैं। उन्होंने लिखा है कि- "On a modest computation we should come to 2500 B.C. as the time of Ṛgveda (Hindu civilzation-67)" ग- दि वैदिक एज के अनुसार : इस ग्रन्थ को भारतीय विद्या भवन, बम्बई ने प्रकाशित किया है। इसके अनुसार ऋग्वेद का समय १००० ई०पू० का है। इसमें लिखा है- "On linguistic ground the language of Ṛgveda, the oldest Veda, may be said to be about 1000 B.C." (Page 225) घ- अमलनेरेकर का मत : प्रसिद्ध लेखक H.G. Wells ने अपनी 'Outlines of World History' में २५०००-५०००० वर्ष पूर्व का विश्व का नक्शा दिया है। नरेकर महोदय ने इसी आधार पर ऋग्वेद का रचना काल ६६०००-७५००० वर्ष पूर्व में बतलाया है। च- प्रोफेसर लोटू सिंह का मत : प्रोफेसर लोटू सिंह ने सनातनी ऐतिहासिक प्रमाणों के आधार पर ऋग्वेद की रचना को ४ लाख ३५ हजार वर्ष पूर्व का बतलाया है। ६- शिलालेखों का आधृत मत : सन् १९०७ ई० पूर्वी एनातोलिया (वर्तमान टर्की) में बोग़ाज कोई नामक ग्राम में खुदाई करने पर डॉ० हूगोविन्कलर को एक प्राचीन शिलालेख उपलब्ध हुआ। यह शिलालेख इस विषय की पुष्टि में एक सशक्त प्रमाण है। पश्चिमी एशिया के इस खण्ड में कभी दो प्राचीन जातियाँ रहती थीं। एक थी हित्तिन्ति तथा दूसरी मितानि। इस शिलालेख पर हित्तियों तथा मितानियों के मध्य १४वीं शती ई०पू० के आरम्भ में होने वाली सन्धि का उल्लेख है। यह एक राजकीय शासनपट्ट के रूप में है। संधिलेख में शपथ ग्रहण करते हुए दोनों जातियों के राजाओं ने प्राचीन बेबिलोनिया तथा हित्ति जाति के देवताओं का आह्वान किया है। इन संरक्षक देवों की सूची में बाबुल देशीय